मेड ने जताई थी मौत की आशंका और पुलिस घंटी बजाकर चली गई
- एक दिन पहले मिली थी पुलिस को बुजुर्ग के मौत की खबर
- कॉलिंग बेल का जवाब न मिलने पर लौट गई पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
अपनी बेटी को खो चुकी और पांच वर्षों से कैंसर से पीड़ित 85 वर्षीय मोहिंद्र कौर की मौत से उनकी बेटी ज्योति भी बेखबर थी। मानसिक तौर पर कमजोर ज्योति के यहां काम करने वाली मेड ने बुजुर्ग की मौत की आशंका जताई, इसके बाद पड़ोसियों ने सेक्टर-सात चौकी पुलिस को इसकी इत्तला दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग के यहां जाकर पुलिस ने घंटी बजाई, कोई बाहर नहीं आया तो पुलिस बैरंग लौट गई। पुलिस का कहना है कि उन्हें इस बात का पता नहीं था कि बुजुर्ग की बेटी मानसिक तौर पर कमजोर है। लेकिन, सवाल यह भी उठता है कि आखिरकार इस बात की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद भी इस मामले की छानबीन गहनता से क्यों नहीं की गई। यह घटना न केवल पुलिस की लापरवाही बल्कि मानवीय संवेदनाओं में हो रही गिरावट की भी बेबाक दास्तान है।
पड़ोसियों के मुताबिक सेक्टर-सात के मकान नंबर-915 में रहने वाली बुजुर्ग महिला पिछले चार पांच वर्षों से कैंसर से पीड़ित थी जबकि बेटी भी मानसिक तौर पर परेशान थी। अपनी मां के साथ रहने वाली ज्योति भी मेड से रोजाना की तरह ही बातचीत कर रही थी। जब उसने देखा कि मोहिन्दर कौर बेसुध हालत में हैं तो तत्काल इस बारे में मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम पर जानकारी दी। इसके बाद उसने पड़ोसियों को भी इस बारे में बताया।
नगर सुधार सभा पंचकूला के चेयरमैन तरसेम गर्ग ने बताया कि उन्होंने पड़ोस में रहने वाले बीके बंसल के साथ मिलकर इस बारे में बातचीत कर पुलिस को तत्काल जानकारी दी। पुलिस मंगलवार को पहुंची भी, लेकिन कॉलिंग बेल का जवाब न मिलने पर पुलिस बैरंग लौट आई। ऐसे मामले पुलिस को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि बुजुर्ग के साथ कोई है या नहीं या क्या वह चलने या बोलने लायक है या नहीं, इसका पता घंटी से नहीं पता चल सकता। तरसेम गर्ग ने कहा कि ऐसे बुजुर्गों के लिए केयरटेकर का होना जरूरी है, लेकिन मेड से मिली जानकारी के बाद जब उन्होंने पुलिस को फोन किया तो भी पुलिस को इसकी भनक नहीं मिली कि सेक्टर-सात के जिस घर से वह छानबीन के बाद लौट चुके हैं, वहां एक बुजुर्ग दम तोड़ चुकी थी।
उधर, मृत महिला मोहिन्दर कौर के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।