बसों में फर्स्ट एड कीट नहीं, टीएम बोले, 2017 में दी थी खरीदकर
- आखिरकार हरियाणा रोडवेज की बसों से कहां गई फर्स्ट एड कीट, अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करें यात्री
- कई बसों में आग बुझाने के लिए नहीं लगे हैं फायर सिलेंडर, पिछले साल हरियाणा रोडवेज की वोल्वो बस में लगी थी आग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
हरियाणा रोडवेज की ओर से 2017 में फर्स्ट एड कीट बस कंडक्टरों की दी गई थी। ताकि सफर के दौरान कोई यात्री चोटिल हो जाए तो उन्हें अस्पताल पहुंचाने से पहले प्राथमिक उपचार मिल सके। लेकिन बुधवार को अमर उजाला ने पंचकूला बस स्टैंड से दूसरे स्टेशनों पर जाने वाली बसों का रियलिटी चेक किया तो पाया कि बसों में फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक उपचार पेटिका) तो हैं, लेकिन उनमें दवाएं नहीं हैं। अधिकतर बसों में फायर फाइटिंग सिस्टम के स्टैंड तो लगे हैं, लेकिन उनमें फायर एक्सटिंग्यूशर नहीं मिले।
वहीं पंचकूला से दिल्ली जाने वाली रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स और फायर फाइटिंग सिस्टम की स्थिति जानी तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।
जब इस संबंध में बस कंडक्टर से पूछा गया कि बस में फर्स्ट एड की सुविधा है कि नहीं तो कंडक्टर ने कहा कि इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि उसकी ड्यूटी सिर्फ एक दिन के लिए बस में लगाई गई है। ऐसे में अगर हरियाणा रोडवेज की बस से लॉग रूट पर यात्रा करनी है तो फर्स्ट एड कीट यात्रा के दौरान अपने साथ लेकर जाएं। क्योंकि बसों में तैनात बस कंडक्टरों को भी नहीं पता कि बस में फर्स्ट एड बॉक्स है या नहीं।
उसके बाद टीम ने करीब आठ लोकल और लंबी दूरी की बसों में रियलिटी चेक किया। इस दौरान देखा गया कि किसी फर्स्ट एड बॉक्स में नट बोल्ट रखे थे तो कोई बिल्कुल खाली था। कई बसों में तो इन बॉक्स में म्यूजिक सिस्टम तक लगा दिए गए हैं। वहीं, हरियाणा रोडवेज के बसों में शिकायत पुस्तिका भी नहीं मिली। लेकिन जब परिचालक से शिकायत पुस्तिका मांगी गई तो उसने देने से इनकार कर दिया।
अगर हम सिर्फ पंचकूला जिले की बात करें तो करीब 150 हरियाणा रोडवेज की बसें रोजाना चलती हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है। लेकिन रोडवेज विभाग की ओर से अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
क्या-क्या होता है प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में
प्रदेश सरकार की ओर से विभाग को सख्त हिदायतें दी गई हैं कि बस में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स होना अनिवार्य है। सरकार की ओर से निर्धारित प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में बैंडेड, ग्लूकोज की बोतल, पट्टी, डिटॉल और अन्य दवाएं शामिल होती हैं, जिनको सिविल सर्जन की ओर से चेक किया जाता है।
ये है नियम
हरियाणा रोडवेज की बसों में फर्स्ट एड बॉक्स का मकसद यह है कि स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी होने या चोट आदि लगने पर यात्री को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए। मामला अगर गंभीर हो तो प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया जाए। रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा अमूमन चालक के पीछे लगे स्टैंड या फिर ऊपर सामान रखने की जगह छोटा बॉक्स बनाकर देने का नियम है। इन बॉक्स में पेट दर्द, सिर दर्द आदि की दवा और मरहम पट्टी की व्यवस्था होती है। खासकर लंबी दूरी की बसों में तो यह व्यवस्था आवश्यक रूप से रखने के आदेश उच्चाधिकारियों ने दे रखे हैं। लेकिन इन आदेशों की हरियाणा रोडवेज बसों में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
छोटी आग पर भी काबू पाना मुश्किल
रोडवेज की कई बसों में आग बुझाने के लिए फायर सिलेंडर नहीं लगे हैं। कुछ में हैं तो वे सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। यानी वो किसी काम के नहीं हैं। इसके चलते किसी भी आग लगने की घटना के समय काफी नुकसान हो जाता है। कई रोडवेज बसों में इस तरह के हादसे हो भी चुके हैं।
क्या कहना है हरियाणा रोडवेज के टीएम का
ट्रैफिक मैनेजर व्योम शर्मा ने बताया कि 2017 में हरियाणा रोडवेज के बस कंडक्टरों को फर्स्ट एड कीट खरीदकर दी गई थी। अगर बसों में फर्स्ट एड की व्यवस्था नहीं है तो उसकी जांच करवाई जाएगी।