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हार न मानने वाले आनंद प्रकाश नहीं जीत सके जिंदगी से जंग

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हार न मानने वाले आनंद प्रकाश नहीं जीत सके जिंदगी की जंग
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- पूर्व डीजीपी को सजा दिलवाने वाले आनंद प्रकाश ने ली अंतिम सांसे
- बेखौफ होकर रुचिका मामले में करते रहे पैरवी
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
रुचिका गिरहोत्रा की मौत के बाद बेखौफ होकर पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को सलाखों के पीछे तक पहुंचाने वाले आनंद प्रकाश अब नहीं रहे। आखिरी सांस तक हक की लड़ाई लड़ने वाले आनंद प्रकाश ने अंतिम दम तक चुनौतियों का निडर होकर सामना किया। प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त आनंद प्रकाश की वीरवार रात करीब 11.45 बजे पंचकूला के सिविल अस्पताल में मौत हो गई। रुचिका की दोस्त आराधना ने इस मामले में गवाही दी थी, जिन्होंने पिता के बाद लड़कियों पर होने वाले किसी भी तरह के अत्याचार करने वालों के खिलाफ लड़ाई की ठान ली है।
किसी भी हालात से जूझने के लिए तैयार रहने वाले पूर्व इंजीनियर, समाजसेवी और बाद में राजनीति में भी अपना वजूद कायम करने वाले आनंद प्रकाश को कभी भी गलतियां बर्दाश्त नहीं थी। बेटी आराधना ने बताया कि अपने पिता के सपने को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं के हक के लिए हर वक्त साथ देंगी। पिता के साथ रुचिका मामले में गवाही के लिए हर सुनवाई पर पहुंचने वाले अनुराधा एक महीने के लिए ऑस्ट्रेलिया से लौटकर पंचकूला आ गईं थी। उन्होंने कहा कि उनके पिता के इरादे पक्के थे। रुचिका की मौत के मामले में पापा ने हर वक्त मेरा पूरा साथ दिया और आखिरी दम तक वह अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे। आनंद प्रकाश की पत्नी मधु प्रकाश पेशे से वकील रही हैं। इनकी दो बेटियां और एक बेटा हैं। सेक्टर-छह के मकान नंबर-210 में सुबह से ही आनंद प्रकाश की मौत की खबर सुनते ही परिजनों को सांत्वना देने के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला चलता रहा।
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पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर पर रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ के 1990 में आरोप लगे। इसके बाद से रुचिका और उसके परिवार वालों पर तरह-तरह के दबाव बनाए गए, ताकि इस मामले की शिकायत पुलिस में न दर्ज करवाई जा सके। दबाव से तंग आकर रुचिका के परिजनों ने शहर छोड़ दिया था जबकि रुचिका ने दिसंबर 1993 में आत्महत्या कर ली थी।
आनंद प्रकाश की पुत्री आराधना और रुचिका अच्छी दोस्त थीं। दोनों साथ-साथ सेक्टर-छह स्थित लॉन टेनिस कोर्ट में जाती थीं। अगस्त, 1990 में एक दिन जब दोनों दोस्त साथ थी, उस वक्त रुचिका के साथ पूर्व डीजीपी ने छेड़छाड़ की थी। पूर्व डीजीपी पर जब आरोप लगे तो इस मामले को दबाने के लिए काफी दबाव बनाया गया। लेकिन घटना के दिन मौके पर मौजूद अनुराधा और आनंद प्रकाश ने रुचिका की मौत के बाद यह ठान लिया कि जब तक आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाएंगे, नहीं रुकेंगे। इरादों के पक्के पिता और बेटी, दोनों ने इस जुल्म के खिलाफ आवाजें बुलंद करते हुए हर गवाही में शामिल हुए।
अनुराधा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि गवाही के दौरान भी अंबाला कोर्ट आने-जाने के लिए हर बार उनके पिता रूट बदलते रहे, ताकि उन पर जानलेवा हमला न हो।
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आज होगा शव का अंतिम संस्कार
आनंद प्रकाश की बड़ी बेटी के अमेरिका से पंचकूला पहुंचने के बाद शनिवार को उनके शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। 74 वर्षीय आनंद प्रकाश की मौत, प्रोस्टेट कैंसर की वजह से सिविल अस्पताल में हुई। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब चल रही थी।
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