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बच्चों की परिक्षाओं को दरकिनार कर लगाऐ जा रहे स्काऊट कैंप, प्राथमिक अध्यापकों में रोष, 17 से 21 तक पांच दिवसिय शिविर का आयोजन मो

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परीक्षाओं को दरकिनार कर लगाए जा रहे स्काउट कैंप
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29 सितंबर से शुरू होनी है पहली से आठवीं की हरियाणा में अर्द्धवार्षिक परिक्षाएं
अतुल गर्ग
मोरनी।
हरियाणा में पहली से आठवीं कक्षा की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 29 सितंबर से शुरू हो रही हैं। जबकि प्राथमिक अध्यापकों को पांच दिवसीय स्काउट कैंपों में भाग लेने के आदेश ब्लॉक स्तर पर थमाए जा रहे हैं। इस बात से प्राथमिक अध्यापकों में भारी रोष है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी कितने सजग व चिंतित है, यह इसका जीता जागता उदाहरण है। काबिलेगौर है कि कैंपों का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब परीक्षाएं बच्चों के सिर पर हैं और रिवीजन के लिए स्कूलों में अध्यापकों की अधिक जरूरत है। बता दें कि पांच दिन के कैंप के बाद बचे समय में भी कुछ साप्ताहिक अवकाश भी शामिल हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग अपने गलत निर्णय लेकर बच्चों के भविष्य से खेल रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के फैसले पर पंचकूला के कुछ प्राथमिक अध्यापकों ने विचार रखते हुए कहा कि ऐसे शिविरों के लिए अवकाश के दिनों में पीटी अध्यापकों को शामिल करना चाहिए, ताकि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सामाजिक कार्यों व भलाई के कार्यों के बारे अच्छे तरीके से सिखाया जा सके। साथ ही बच्चों की पढ़ाई को नुकसान न न हो।
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परीक्षाओं के वक्त नहीं लगने चाहिए कैंप
गोपी चंद जिला प्रधान प्राथमिक अध्यापक संघ का कहना था कि पंचकूला प्राथमिक अध्यापक संघ शिक्षा विभाग के के फैसले का विरोध करता है। परीक्षाओं के वक्त इन कैंप का आयोजन नहीं होना चाहिए। अध्यापकों की इच्छा के बिना उन पर थोपे जाने वाले फैसले से कई अध्यापकों को परेशानी भी उठानी पड़ती है, खासकर महिलाओं को।

बडीशेर लगाए जा चुके हैं ये कैंप
अध्यापक धीरज शर्मा का कहना था कि ऐसे कैंप में उन अध्यापकों को भेजना चाहिए, जो इस प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने के इच्छुक हों। परीक्षाओं से काफी पहले मोरनी के बडीशेर क्षेत्र में ऐसे कैंप का आयोजन किया गया था। जिसमें भाग लेकर अच्छा कार्य करने वाले कृष्ण कौशिश व अन्य अध्यापकों को प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया गया था।
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यह स्टेट बॉडी का फैसला है : डीईओ
इस बारे जब जिला शिक्षा अधिकारी हरमिंद्र सैणी से बात की गई तो पहले उन्होंने कहा कि पता कराते हैं कि किसने ये लेटर जारी किए हैं। जब उन्हें बताया कि पंचकूला जिला में खंड स्तर पर यह लेटर दिए गए हैं तो उनका कहना था कि यह स्टेट बॉडी का फैसला था, जिस पर हमने अध्यापकों को सूचित किया है।
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