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शहर में ट्रैफिक समस्या से प्रतिदिन जूझते हैं वाहन चालक, ट्रैफिक पर नहीं ट्रैफिक पुलिस का नियंत्रण

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ट्रैफिक पुलिस से बेकाबू हुआ पिंजौर का ट्रैफिक
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अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर।
मल्लाह चौक से लोहगढ़ तक रोज स्थानीय और शहर से गुजरने वाले वाहन चालक ट्रैफिक समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। शहर में ट्रैफिक की समस्या की गंभीरता को अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र आधा किलोमीटर का रास्ता पूरा करने में कार चालक को आधे घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है। देर शाम ट्रैफिक समस्या और गंभीर हो जाती है, जब बद्दी और नालागढ़ की ओर से आने वाली बसें और ट्रक शहर में प्रवेश करते हैं। खास बात यह है कि रोजाना लगने वाले जाम के कारण वाहन रेंग रेंगकर मेन बाजार से गुजरते हैं, लेकिन नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से शिकंजा कसने की कोशिश तक नहीं की जाती है। वाहन चालक शहर के संकीर्ण रोड पर दो तीन लाइनें लगा लेते हैं। इस कारण आगे की ओर से आने वाले वाहनों का रास्ता बंद हो जाता है। इसके साथ-साथ वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
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अतिक्रमण से शहर की दिक्कतें बढ़ीं
नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की ओर से सख्त कार्रवाई न होने पर कई दुकानदार भी मनमर्जी पर उतर आए हैं। वह दुकानों का सामान दुकानों से बाहर रोड तक रखने लगे हैं। इसके अलावा नियमों की अनदेखी करते हुए कई वाहन चालक रोजाना रोड पर ही वाहन पार्क करने लगे हैं। चालान काटना तो दूर ट्रैफिक पुलिस की सुस्ती के कारण इन्हें रोड से भी नहीं हटाया जाता है। लोगों का कहना है कि शहर में ट्रैफिक पुलिस नाम की कोई चीज नहीं है। अगर शहर में ट्रैफिक पुलिस है तो वह ट्रैफिक कंट्रोल करने के बजाय एक जगह बैठकर विभाग द्वारा दिए चालान के टारगेट पूरा करती है। इसके अलावा शहर में तीन शिफ्ट में शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर नो एंट्री है। लेकिन जब नो एंट्री खुलती है तो रोड पर भारी वाहनों की कतार लग जाती है। इस कारण जाम जैसे हालात हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि नो एंट्री खोलने के दौरान एक निश्चित समय सीमा के बाद एक साथ करीब 15-15 करके ट्रक छोड़ने चाहिए।
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