पैदल चलकर समस्याएं सुनने पहुंची डीसी
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
डीसी गौरी पराशर जोशी ने मोरनी ब्लॉक के पिछडे़ गांवों में शुमार गवाही में बुधवार को खुला दरबार लगाया। मुख्यमंत्री नेे मोरनी आगमन पर उन गांवों व क्षेत्रों में जाने का लक्ष्य रखा था, जिनमें आज तक जिला स्तर का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंच है। कई किलोमीटर पैदल चल गवाही गांव में पहुंचीं डीसी का गांव के लोगों ने उत्साह के साथ स्वागत किया। यहां यह बताना जरूरी है कि यह पिंजौर ब्लॉक का गवाही गांव नहीं बल्कि मोरनी में आने वाला दूसरा गवाही गांव है। यहां डीसी ने 146 शिकायतों को संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान के आदेश दिए। इस अवसर पर उनके साथ एडीसी राजेश जोगपाल, उपमंडल अधिकारी नागरिक पंकज सेतिया सहित, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजवीर सिंह खुंडिया, जिला शिक्षा अधिकारी हरमेंद्र सैनी, लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता हरपाल सिंह, जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता शिवराज सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
आदर्श गांव के अनुरूप होगा विकास
डीसी ने बताया कि सरकार ने मोरनी के इस गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी के दृष्टिगत डीसी ने अधिकारियों की टीम के साथ गांव का दौरा किया। यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के आदेश अधिकारियों को दिए। वहीं आदर्श गांव बनाने में पहले कदम के तहत डीसी, एडीसी, उपमंडल अधिकारी नागरिक ने पौधरोपण किया।
ये रहीं लोगों की मांगें
खुले दरबार में बिजली, पानी, सड़क, मोबाइल नेटवर्क, बचाव दीवारें लगवाने, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बनवाने, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली सूची में नाम दर्ज करने, सिंचाई की पक्की कूहल, शिवालिक विकास बोर्ड के माध्यम से कई पंचायतों में बरसाती नालों व धर्मशालाओं का निर्माण कराने की मांगें रखी गईं। साथ ही ठंडोग पंचायत में गांव में पानी की पक्की कूहल का निर्माण, बिजली के पोल लगवाने की मांग की भी डीसी के सामने रखी गईं। कई पंचायतों में हिमाचल से आने वाले लावारिस पशुओं से निजात दिलाने की दिशा में भी कदम उठाने का आग्रह किया गया। गवाही गांव के लोगों ने डीसी को इलाके के गांवों में मूलभूत समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां ग्रामीण मुश्किलों में जीने को मजबूर है। यहां ग्रामीणों के पास आय के साधन न होने के कारण लोगों को पुश्तैनी कार्यों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जो गांवों में रहकर ही किए जा सकते हैं। इसीलिए सभी गांवों में मूलभूत सुविधाओं का हल किया जाना चाहिए।