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खूबसूरती,श्रद्वा और जुल्म का साक्षी है विश्व प्रसिद्व यादविंद्रा गार्डन

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खूबसूरती, श्रद्धा और जुल्म का साक्षी है यादविंद्रा गार्डन
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आज पिंजौर आने वाले पर्यटकों में रहेगी गार्डन को जानने की उत्सुकता
डीके चौहान
पिंजौर।
पिंजौर स्थित खूबसूरत यादविंद्रा गार्डन में शनिवार को मैंगो फेस्ट का आयोजन होगा। जहां एक तरफ मैंगो मेले का लुत्फ उठने के लिए पर्यटक पहुंचेंगे। वहीं गार्डन के रोचक तथ्यों को जानने की उनमें उत्सुकता रहेगी। पर्यटक जान सकेंगे कि जितना खूबसूरत गार्डन है उतना ही रोचक इसका इतिहास भी है। यादविंद्रा गार्डन का निर्माण 17वीं सदी में हुआ था और यह उत्तर भारत का सबसे पुराना गार्डन है। गार्डन में प्रवेश द्वारा से लेकर गार्डन के पीछे की दीवार तक 7 टैरेस मंजिलें बनी हैं। गार्डन का प्रवेश द्वार 7वें टैरेस पर बना है। जबकि ओपन थिएटर गार्डन के अंतिम टैरेस पर है। गार्डन के इस स्वरूप का डिजाइन मुगल शासक औरंगजेब के विश्वासपात्र लेफ्टिनेंट और आर्किटेक्ट फिदाई खान ने किया था।

गार्डन के संबंध में जानने वाले कुछ रोचक तथ्य

ट्रेन के इंजन की तरह है करीब सौ साल पुुराना डीसी जनरेटर
जब आप मैंगो मेले में शिरकत करने पहुंचते हैं तो गार्डन के बाहर एक बड़ा सा दिखने वाला जनरेटर दिखेगा। जो देखने से ऐसा लगता है कि जैसे यह कोई पुराने जमाने का किसी ट्रेन का इंजन है। लेकिन असल में यह महाराजा पटियाला की ओर से इंग्लैंड से मंगाया गया डीसी जनरेटर है। इस जनरेटर से राजा पटियाला के दौरान गार्डन का मुख्य द्वारा, शीश महल, जल महल और रंगमहल रोशन हुआ करते थे। जनरेटर में लगा डाइनेमो लंदन की सिमनस एंड ब्रदर्स कंपनी द्वारा निर्मित है। इस डाइनेमो को चलाने के लिए इंजन में भाप कोयले से पैदा की जाती थी। इस जनरेटर को इंग्लैंड से पानी के जहाज से मुंबई लाया गया था। वहां से इसे पिंजौर के यादविंद्रा गार्डन में पहुंचाया गया।
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धार्मिक कट्टर थे मुगलकालीन शासक
मुगलकालीन शासकों की अपने धर्म के प्रति कट्टरता का जीता जागता उदाहरण हैं गार्डन को चारों तरफ से घेरे हुईं ये दीवारें। यादविंद्रा गार्डन के प्रवेश द्वार से शुरू होकर गार्डन के चारों तरफ बाहरी सीमा की दीवारें तत्कालीन मुगलकालीन शासकों की ओर से मंदिरों के विध्वंस का जीता जागता प्रमाण है। गार्डन की चारदीवारी देखने पर पता चलता है कि इनके निर्माण में मंदिर की खंडित मूर्तियां, मंदिर की दीवारों इत्यादि का प्रयोग किया गया है। बताया जाता है कि पिंजौर में भीमा देवी मंदिर के अलावा और भी मंदिर थे। जिसे मुगल शासकों ने अपने जुल्म से नष्ट कर दिया था। उन्हीं मंदिरों को नष्ट कर खंडित मूर्तियों और मंदिर के पत्थरों इत्यादि से औरंगजेब के शासनकाल में गार्डन की चहारदीवारी बनाई गई।
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गार्डन में मौजूद है पंच पीर बाबा की दरगाह
गार्डन में प्रवेश करने के बाद बाईं ओर तकरीबन 100 मीटर आगे जाने पर मुगलकालीन पंच पीर बाबा की दरगाह है। गार्डन कर्मचारियों के अलावा स्थानीय लोगों की पंच पीर बाबा की दरगाह में विशेष आस्था है। उनका कहना है की जो श्रद्धा से यहां शीश नवाता है तो उसकी बाबा हर मनोकामना पूरी करते हैं। हर साल यहां स्थानीय लोगों के साथ गार्डन के कर्मचारियों द्वारा भंडारे का आयोजन किया जाता है। हर वीरवार को दरगाह में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है।
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