चंडीगढ़। सेक्टर-17 के परेड ग्राउंड में एक ओर जहां अलग-अलग नस्लों के बेहतरीन कुत्तों का प्रदर्शन कर उनके मालिक वाहवाही लूट रहे थे, वहीं दूसरी ओर पार्किंग में खड़ी दो कारों में 12 बेजुबान पिल्ले (डॉग्स के बच्चे) भूख और प्यास से तड़प रहे थे। इन पिल्लों की रोने की आवाज सुनकर सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (एसपीसीए) एनजीओ की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर इनका रेस्क्यू किया। एक कार से एक और दूसरे से 11 पिल्ले निकाले गए। सभी पिल्लों को कब्जे में लेकर क्रूरता के लिए इनके मालिकों का चालान काटा गया।
एनजीओ एसपीसीए के इंस्पेक्टर धमेंद्र डोगरा ने बताया कि रविवार को डॉग शो के दौरान वह सेक्टर-17 के परेड ग्राउंड में इस बात की जांच कर रहे थे कि कहीं डॉग शो की आड़ में महंगे नस्ल के कुत्तों की खरीद-फरोख्त तो नहीं की जा रही। इस बीच पार्किंग में खड़ीं दों कारों की डिक्की से कुछ पिल्लों के रोने की आवाजें आ रहीं थीं।
एसपीसीए टीम ने डिक्की खोलने की काेशिश की लेकिन कार की चाबी न होने के कारण वह उसे खोल नहीं पाए। इसके बाद उन्होंने डॉग शो में जाकर दोनों कारों के नंबर प्लेट को बताते हुए अनाउंसमेंट करवाई और मालिकों को तुरंत पार्किंग में पहुंचने को कहा। अनाउंसमेंट के करीब डेढ़ घंटे बाद कार मालिक पार्किंग में पहुंचे।
इसके बाद एसपीसीए टीम और पुलिस की मौजूदगी में दोनों कारों से 12 पिल्लों को रेस्कयू किया गया। एक कार की डिक्की में 11 और दूसरे की डिक्की में एक पिल्ला बंद था। इनमें गोल्डन रिट्रीवर, हास्की व खिलौना पॉम नस्ल के चार-चार पिल्ले शामिल हैं। इंस्पेक्टर धमेंद्र ने बताया जब इन पिल्लों को कारों की डिक्की से बाहर निकला गया तो वह भूख और प्यास से बिलख रहे थे। कई घंटों से उन्हें बिना भोजन, हवा व पानी के कार की डिक्की में बंद रखा गया था। लुधियाना के दिलजीत सिंह की कार की डिक्की से 11 और मलेरकोटला के दलबीर सिंह की कार की डिग्गी से एक पप्पी रिकवर किया गया।
इन दोनों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत धारा 11 (1), ए, डी, ई, जी, एच, आर के तहत कार्रवाई कर इनके चालान किए गए। इंस्पेक्टर धमेंद्र ने बताया कि अब पिल्लों के मालिकों को अदालत में पेश होना होगा। बरामद सभी 12 पिल्लों को सेक्टर-38 के एसपीसीए सेंटर ले जाकर उनका मेडिकल कराया गया।