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साल 2017 में 118 सरकारी दफ्तरों पर छापे, 149 कर्मियों को रिश्वत लेते दबोचा

Sun, 31 Dec 2017 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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गिरफ्तार - फोटो : gettty
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सरकारी दफ्तरों से भ्रष्टाचार के मुकम्मल खात्मे के लिए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अपनाई गई रणनीति के तहत इस वर्ष पूरे पंजाब में 118 ट्रैप लगाए गए। इनमें 132 सरकारी कर्मचारियों के अलावा 17 गैरसरकारी व्यक्तियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
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विजिलेंस ब्यूरो के मुख्य निदेशक व एडीजीपी बीके उप्पल ने वर्ष के अंत में ब्यूरो की कार्यकुशलता का ब्योरा पेश करते हुए बताया कि इस पूरे वर्ष के दौरान रिश्वतखोरी के आरोप में काबू किए गए कुल 132 मुलाजिमों में से 12 गजटेड अफसर और 122 नान-गज़टेड अधिकारी शामिल हैं। इन में से ही 16 मामलों में विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को 50,000 रुपये से लेकर 2 लाख तक की रिश्वत राशि लेते हुए मौके पर पकड़ा गया।

उन्होंने बताया कि रिश्वत लेते रंगे हाथों काबू किए गए आरोपियों में माल विभाग के 34 कर्मचारी, पुलिस विभाग के 39, बिजली विभाग के 12, स्थानीय निकाय के 7, पंचायत और ग्रामीण विकास के 6 और सिंचाई विभाग के 5 कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा की तरफ से भी विजिलेंस को रिश्वतखोर पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा गया है, जिससे वह अपनी ड्यूटी इमानदारी के साथ निभाएं। 
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विजिलेंस की तरफ से अदालतों में पेश किए चालानों के नतीजे के परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार नियंत्रण कानून के अधीन 44 मुकदमों में 8 गजटेड अफसरों, 37 नॉन-गजटेड कर्मचारियों और 17 अन्य को अलग-अलग विशेष अदालतों की तरफ से 1 से 7 साल तक की कैद की सजा और 1500 से 2,00,000 रुपये तक कुल 17,59,000 रुपये जुर्माना हुआ। 

साल भर चर्चा में रहे यह मामले
बीके उप्पल ने बताया कि इस साल भ्रष्टाचार के प्रमुख मामलों में सुरिंदरपाल सिंह रखवाला इंजीनियर गमाडा और उसकी कंपनियों में हिस्सेदार, चर्चित सिंचाई घोटाले में शामिल गुरिन्दर सिंह ठेकेदार समेत विभाग के सात अन्य इंजीनियर, हरीके नहर के घोटाले में चीफ़ इंजीनियर जतिन्दर सिंह समेत चार अन्य अधिकारी, खरड़ केमिकल प्रयोगशाला के डाक्टर हरजिंदर सिंह और ऐनालिस्ट सवीना शर्मा, ज़िला जेल मानसा के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट गुरमीत सिंह बराड़ और लोक निर्माण विभाग के एससी परमिंदर सिंह टिवाना के मामले शामिल हैं।
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