चंडीगढ़ नगर निगम ने अपने सभी बड़े भवनों पर सोलर पैनल लगाने का फैसला किया है। इसके लिए 112 भवनों का चयन किया गया है। करीब 17 करोड़ से सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे जो भी बिजली पैदा होगी, उसे ग्रिड को दिया जाएगा।
नगर निगम की कोशिश है कि वर्तमान वित्त वर्ष में भवनों पर सोलर पैनल लगाने का काम शुरू कर दिया जाए। सदन की अगली बैठक में यह एजेंडा आ सकता है।
नगर निगम ने आंकलन किया है कि सभी भवनों पर जो सोलर पैनल लगाए जाएंगे, उस पर आया 17 करोड़ का खर्च आठ साल में रिकवर कर लिया जाएगा, जबकि यह पैनल 25 वर्षों के लिए स्थापित होंगे। दावा है कि निगम के सभी बड़े भवनों पर सोलर पैनल लगाने से बिजली की काफी बचत होगी। वर्तमान वित्त वर्ष के बजट में ही इस परियोजना के लिए बजट रखा गया है, इसलिए कोशिश है कि वित्त वर्ष में ही काम शुरू कर दिया जाए।
यह सोलर पैनल नगर निगम की ओर से संचालित किए जा रहे गोशाला, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) केंद्र समेत सभी कम्युनिटी सेंटर व अन्य इमारतें पर लगाए जाएंगे। इन सोलर पैनल से जो अतिरिक्त बिजली पैदा होगी, उसे ग्रिड को दिया जाएगा। निगम के इस फैसले से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासन की ओर से तय किए गए लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
बता दें कि प्रशासन ने सोलर से 75 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। प्रशासन ने पहले ही 500 गज के घरों के लिए छतों पर सोलर पैनल लगाना अनिवार्य कर दिया था। इस कारण शहर देश के केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा सोलर ऊर्जा उत्पन्न करने वाला प्रदेश बन गया है। यहां पर अभी लगभग 64 मेगावाट सोलर ऊर्जा की क्षमता वाले सोलर पैनल लगे हुए हैं। प्रशासन ने 2025 तक 100 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा है।