चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल के गोल्फर अंगद चीमा को इस सीजन में अपनी निरंतरता के लिए उचित इनाम मिला। उन्होंने शनिवार को विशाखापत्तनम में ईस्ट प्वाइंट गोल्फ क्लब (ईपीजीसी) में खेले जाने वाले एक करोड़ रुपये के विजाग ओपन 2024 का खिताब अपने नाम किया। यह उनका दूसरे पीजीटीआई खिताब रहा। इसके लिए उन्हें 11 वर्ष का इंतजार करना पड़ा।
शुक्रवार को रातभर तीन शॉट से आगे चल रहे अंगद चीमा (69-61-70-68) ने शनिवार को अंतिम राउंड में तीन अंडर 68 का स्कोर बनाया और टूर्नामेंट में उनका कुल स्कोर 16 अंडर 268 रहा। हालांकि, चीमा, जिन्होंने इस सीजन में दो रनर-अप सहित छह बार शीर्ष 10 में जगह बनाई थी। राउंड के अंत में अमन राज (66-68-69-65) द्वारा लगातार बर्डी लगाने के बाद लीडर बोर्ड में शीर्ष पर पहुंच गए। उन्होंने दिन का सर्वश्रेष्ठ स्कोर छह अंडर 65 बनाया और इस तरह से वह 16 अंडर पर अंगद के बराबर पहुंच गए और मैच को प्लेऑफ में ले गए। चीमा ने आठ फीट के बर्डी पुट को गोल में बदलकर प्लेऑफ जीत लिया और इस तरह 15 लाख रुपये का विजयी चेक हासिल किया जिससे वह टाटा स्टील पीजीटीआई रैंकिंग में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गए। बंगलूरू के आर्यन रूपा आनंद (67) दूसरे और गुरुग्राम के कार्तिक शर्मा (70) कुल 10 अंडर 274 के स्कोर के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे।
पिछले हफ्ते हैदराबाद में पीजीटीआई में उपविजेता रहे अंगद चीमा (34) ने अंतिम दिन 16वें होल तक तीन शॉट के आरामदायक अंतर से बढ़त बनाए रखते हुए मुक़ाबले पर मज़बूत पकड़ बनाए रखी। उन्होंने बेहतरीन पुटिंग की बदौलत पांच में से चार बर्डी कन्वर्जन 12 से 20 फीट की रेंज से किए। छह फुट एक इंच लंबे अंगद ने फिर प्लेऑफ होल पर बेहतरीन टी शॉट और अप्रोच शॉट से पहल की और जीत के लिए आठ फुट का शॉट लगाया। चीमा ने अपना बर्डी पुट लगाया जबकि अमन 20 फीट से अपना बर्डी पुट चूक गए। यह चीमा की तीसरी पेशेवर जीत थी क्योंकि अब उनके पास पीजीटीआई में दो खिताब और पीजीटीआई फीडर टूर में एक खिताब है।
अंगद बोले- कई मौकों पर जीत के करीब पहुंचा पर चूक गया
चैंपियन बनने के बाद चीमा ने कहा, ‘इतने लंबे समय के बाद आखिरकार जीतना मेरे लिए बहुत बड़ी राहत की बात है और मेरे कंधों से बोझ उतर गया है। पिछले कुछ सालों से कई मौकों पर जीत के करीब पहुंच चुका था, लेकिन जीत नहीं पाया था। अब बड़ी चीजों के लिए तत्पर हूं। इस सीजन और खासतौर पर आज मेरा दृष्टिकोण सिर्फ़ यही था कि मैं बिना ज्यादा चिंता किए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूं क्योंकि परिणाम मेरे हाथ में नहीं था। इतनी बार जीत के करीब पहुंचने के बावजूद न जीत पाना कष्टप्रद था, अब आत्मविश्वास बढ़ गया है। आगे के टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन जारी रहेगा।