पत्नी बलजीत कौर के साथ अपने बगीचे में गुरबख्श सिंह।
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उनकी पत्नी बलजीत कौर रिटायर हैं और बेटा विदेश की कंपनी के साथ बिजनेस करता है। दोनों ही उनकी सहायता करते हैं। बलजीत कौर ने बताया कि अब उन्हें भी गार्डनिंग करने में अच्छा महसूस होने लगा है।
खराब पड़ीं लकड़ियों में पेंट कर बगीचे की रेलिंग बनाया
गुरबख्श सिंह ने बताया कि उनके घर के सामने मरम्मत का काम चल रहा था। इसमें खराब लकड़ी को घर के बाहर फेंक दिया गया था। उन्होंने उन लकड़ी को उठाकर उसकी कटिंग कर उसे पेंट किया और बगीचे के चारों तरफ रेलिंग बनाई। इसके अलावा छोटे- छोटे पत्थरों को कलर कर बगीचे में सजाया। लॉकडाउन में वह पूरा दिन लगे रहते थे। आज उनका बगीचा इतना हरा भरा है कि वह केवल दो घंटे अपने बगीचे को देते हैं।
मोहाली के गांव से लेकर आते हैं खाद
उन्होंने बताया कि पौधों में कच्ची खाद (कच्चा गोबर) डालने और ज्यादा पानी देने से कीड़ा लगता है। इसीलिए वह मोहाली के एक गांव से तीन-चार साल पुरानी गोबर की खाद लेकर आते हैं। इससे पौधों को किसी प्रकार की बीमारी नहीं लगती और न ही वह मरते हैं।
कीड़ों से पौधों को बचाती है लीथल की एक बूंद
उन्होंने बताया कि पौधों के लिए लीथल नामक दवाई काफी कारगर साबित होती है। उसकी मात्र एक बूंद से काफी पौधों को फायदा होता है। इस दवाई की गंध चारों तरफ फैल जाती है जिससे पौधों में चीटियां और दीमक नहीं लगती। इस दवाई से पौधों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता।