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जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं बरसी पर अमृतसर आए उपराष्ट्रपति, सिक्का और डाक टिकट जारी

Sat, 13 Apr 2019 05:45 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायड़ू
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आज जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं बरसी पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू अमृतसर पहुंचे। यहां उन्होंने एक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उपराष्ट्रपति शहीदों को श्रद्धांजलि देने के जलियांवाला बाग पहुंचे थे। यहां पंजाब सरकार की ओर से शताब्दी समारोह आयोजित किया गया है। इस समारोह में शिरकत करने के लिए ही उपराष्ट्रपति आए। यहां उन्होंने पहले शहीदों को नमन किया और फिर सिक्का व डाक टिकट जारी किया। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जलियांवाला बाग पहुंचे थे।
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायड़ू ने जलियांवाला बाग परिसर का दौरा किया। उसके बाद विजिटर्स बुक में एक संदेश भी लिखा। उन्होंने क्या लिखा, यहां पढ़िए...
 
 

ऐसे अंजाम दिया गया था नरसंहार

13 अप्रैल 1919 को क्रूर अंग्रेज सिपाहियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियों बरसा कर 1000 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वाले इन बेकसूर लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट, अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों व दो नेताओं सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे।

शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी सैंकड़ों लोग बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए हुए थे। जलियांवाला बाग में सभा की खबर सुन कर लोग वहां जा पहुंचे थे। करीब 5,000 लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठे थे। ब्रिटिश सरकार के कई अधिकारियों को यह सभा 1857 के गदर की पुनरावृत्ति जैसी लग रही थी, जिसे न होने देने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार थे। इसके लिए जनरल डायर को जिम्मेदारी दी गई।

जब नेता बाग में पड़ी रोड़ियों के ढेर पर खड़े होकर भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुंच गया। सैनिकों ने बाग को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। 10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियांवाला बाग उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहां तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था।
 
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शहीद ऊधम सिंह ने लिया था बदला

जब गोलियां चलने लगीं तो लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे, लेकिन उस संकरे रास्ते के अलावा भागने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में बने कुएं में कूद गए और देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है।

ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है। अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। इस घटना के प्रतिघात स्वरूप सरदार उधमसिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में इस घटना के समय ब्रिटिश लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल डायर को मार दिया था। उन्हें 31 जुलाई 1940 को फांसी पर चढ़ा दिया गया।

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