विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार की कोशिशों का रंग दिखने लगा है। चीन (शंघाई) की 100 माइक्रो, स्मॉल, मीडियम एंटरप्रेन्यॉर (एमएसएमई) के साथ प्रदेश सरकार जल्द ही 6000 करोड़ के एमओयू साइन करेगी।
इनमें आईटी, फार्मा, गारमेंट्स, इंजीनियरिंग सहित अन्य क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियां शामिल होंगी। एक साथ 100 एमएसएमई के निवेश से प्रदेश की औद्योगिक विकास की रफ्तार में तेजी के साथ-साथ हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावनाएं भी पैदा होंगी।
औद्योगिक विकास में तेजी लाने को हरियाणा के मुख्यमंत्री की पहल पर सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए चीन, जापान, अमेरिका और कनाडा के उद्यमियों से मुलाकात कर निवेश पर बातचीत की। हरियाणा में निवेश की संभावनाओं और प्रदेश की मौजूदा सुविधाओं से निवेशकों को रू-ब-रू कराया गया।
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) के डीजीएम मनोज पाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के चीन दौरे के दौरान शंघाई की एमएसएमई ने अलग-अलग क्षेत्रों में हरियाणा में निवेश के लिए रुचि दिखाई है।
हरियाणा में सस्ते श्रमिक, बेहतरीन बुनियादी सुविधाएं और कच्चे माल की उपलब्धता के साथ-साथ दिल्ली से नजदीकी के कारण एमएसएमई के लिए प्रदेश पहली पसंद के तौर पर उभरने लगा है। एक साथ 100 एमएसएमई के आने से लगभग 6000 करोड़ का निवेश होगा, बल्कि रोजगार की संभावनाएं भी काफी बढ़ जाएंगी।
हरियाणा के छोटे शहरों का भी रुख करेंगी कंपनियां
एनसीआर के बाद प्रदेश के अन्य शहरों में भी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दौरा करना शुरू कर दिया है। अपनी जरूरतों और मौजूदा सुविधाओं का आकलन करने के बाद एमएसएमई शहरों का चुनाव करेंगी। एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों के मुताबिक इससे प्रदेश के सभी जिलों में निवेश से प्रदेश में एक समान औद्योगिक विकास का मौका मिलेगा।