चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी एनैबलिंग सेंटर (टीईसी) ने चंडीगढ़ स्टार्टअप पॉलिसी पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में शिक्षाविदों, उद्योग जगत, स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लेकर शहर के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम से पहले 10 स्टार्टअप्स ने 7 निवेशकों के सामने अपनी तकनीक और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किए। इस दौरान निवेश के बदले हिस्सेदारी (इक्विटी) के आधार पर फंडिंग पर चर्चा हुई।
सत्र की अध्यक्षता इंडियन आईआईटी कानपुर के प्रो. एनएस व्यास ने की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को मैन्युफैक्चरिंग हब के बजाय टेक्नोलॉजी नर्व सेंटर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जो पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के उद्योगों को तकनीकी सहयोग दे सके। प्रशासन की ओर से उद्योग विभाग की प्रतिनिधि विजयता भी मौजूद रहीं।
आईआईटी रोपड़ की डॉ. राधिका त्रिखा ने बताया कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड (आरडीआईएफ) स्टार्टअप्स को पूंजी और व्यवसायीकरण में मदद दे सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्कूल स्तर से उद्यमिता शिक्षा शुरू की जाए और वन-स्टॉप स्टार्टअप कैफे बनाया जाए, जहां उद्यमी और निवेशक प्रशासन से सीधे संवाद कर सकें।