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10 पंजाबी युवकों को फांसी से बचाने की कवायद तेज, ओबराय से आस

Thu, 08 Dec 2016 11:07 AM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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पंजाबी युवकों को फांसी से बचाने की कवायद तेज
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आबूधाबी में दस पंजाबी युवकों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद इन्हें बचाने की कवायद तेज हो गई है। सरबत दा भला ट्रस्ट के चेयरमैन एसपी सिंह ओबराय खुद दुबई जाने की तैयारी में हैं। उन्होंने फिलहाल एक महिला वकील के माध्यम से हाईकोर्ट आबूधाबी में याचिका दायर कर दी है लेकिन इसका अंतिम रास्ता ब्लड मनी का भुगतान करना ही है। 
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एसपी सिंह ओबराय बुधवार को दुबई जाना चाहते थे, लेकिन धुंध होने से दुबई की फ्लाइट्स रद्द कर दी गई। अब वह अगले दो-तीन दिन में दुबई के लिए निकल जाएंगे और वहां जाकर मृतक के परिवार से संपर्क करने की कोशिश करेंगे, ताकि किसी तरह से उनको मनाकर ब्लड मनी देकर 10 पंजाबी युवकों को फांसी के फंदे से बचा लिया जाए। 

पाक नागरिक की हत्या का आरोप
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पंजाब के 11 नौजवानों को एक पाकिस्तानी के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन सबके बीच अवैध शराब की ब्रिकी पर झगड़ा हुआ था। इनमें से दस युवकों को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई है जबकि 11वें आरोपी को 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया। इस केस को पहले ही सरबत दा भला ट्रस्ट के एसपी सिंह ओबराय देख रहे थे। उन्होंने कहा कि अरब देशों में सीधा फार्मूला है कि फांसी के फंदे से अदालत तभी राहत देती है, जब ब्लड मनी मृतक के परिवार को अदा की जाए।
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पांच साल पहले बचाए थे 17 युवक 

एसपी सिंह ओबराय, चेयरमैन, सरबत दा भला
यह है ब्लड मनी 
ब्लड मनी को न्याय का तरीका माना जाता है। हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे की रकम को ब्लड मनी कहा जाता है। यह धनराशि हत्या करने वाला चुकाता है और इसके बदले में पीड़ित परिवार उसकी सजा माफ कर देता है। यह रकम तभी दी जा सकती है जब पीड़ित पक्ष लेने के लिए तैयार हो। 

इन्हें मिली है सजा 
यूएई के इस केस में नवांशहर के हरप्रीत सिंह और अजय कुमार, बरनाला के सतमिंदर सिंह, होशियारपुर से चंद्रशेखर, मोगा से हरजिंदर, लुधियाना के कुलविंदर सिंह और धर्मवीर सिंह, अमृतसर के तरसेम सिंह, पटियाला के गुरप्रीत सिंह, गुरदासपुर के जगजीत और बटाला के टोनी को सजा सुनाई गई है। सभी युवक गरीब परिवारों से हैं और वहां पलंबर, मिस्त्री और इलेक्ट्रीशियन का काम करते हैँ। 

पांच साल पहले बचाए थे 17 युवक 
18 मार्च 2010 को शाहजाह में पंजाब और हरियाणा के 17 युवकों को एक पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खान की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। इस केस में 27 जुलाई 2011 को एस सिंह ओबराय ने पीड़ित परिवार को पाकिस्तानी आठ करोड़ रुपये ब्लड मनी के तौर पर दिए थे। इसके बाद 12 सितंबर 2011 को कोर्ट ने यह समझौता स्वीकार किया और युवकों को दो साल कैद सुनाई लेकिन वे सब तीन साल पहले ही जेल में बिता चुके थे। इसलिए इन्हें रिहा कर दिया गया। 

हमने अपने संपर्क सूत्रों के माध्यम से मृतक के परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश शुरू कर दी है। कुछ पाकिस्तानी लोगों की सहायता ली गई है। हम कोशिश करेंगे कि किसी तरह मृतक के परिवार वालों को पाकिस्तान से दुबई बुलाकर उन्हें ब्लड मनी अदा कर दी जाए।
एसपी सिंह ओबराय, चेयरमैन, सरबत दा भला 
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