गुड्स एंड सर्विस टैक्स शुरू होने के बाद अगर आप सेकेंड हैंड सामान खरीदते या बेचते हैं, तो फिर आपको राहत मिलेगी। इस तरह के सामान खरीदने-बेचने पर किसी तरह का कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
सरकार ने अब नियमों में बदलाव करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने यूज गुड्स को बेचता है तो उस पर जीएसटी देने का कोई मतलब नहीं है। ये नियम कार, घर का सामान, गोल्ड ज्वैलरी आदि सभी पर लागू होगा।
यह शर्त होगी लागू
हालांकि सरकार ने कहा है कि ऐसा सामान तभी जीएसटी के दायरे में नहीं आएगा, जब उसकी कीमत रिटेल प्राइस से कम हो। अगर पुराने बेचे गए सामान को उसके रिटेल प्राइस के बराबर बेचा गया तो जीएसटी देना होगा। उदाहरण के लिए अगर आपने 2015 में कोई गाड़ी 5 लाख रुपये की खरीदी है और 2017 में अब 2 लाख रुपये में बेचता है, तो उस पर जीएसटी नहीं लगेगा। लेकिन डीलर को जीएसटी देना होगा। इससे हो सकता है कि आगे चलकर पुरानी गाड़ियों के दाम बढ़ जाये।
जीएसटी एक्ट के नियम 32(5) के अनुसार अगर आपने किसी पुराने सामान को कम मार्जिन पर बेचा है और उस पर किसी तरह का कोई इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं लगा है, तो ऐसा सामान जीएसटी के दायरे में नहीं आएगा। लेकिन अगर ऐसे सामान पर ज्यादा मार्जिन अथवा इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया है तो जीएसटी देना होगा।
इसको ऐसे समझेंः मान लिजिए आपके पास पहले से गोल्ड पड़ा है, जो आपने 10 साल पहले 2007 में 25 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की दर पर खरीदा था। आज की तारीख में आप इसे बेचने जाते हैं और यह 28 हजार प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। ऐसे में आपको 3 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम का फायदा होगा। इस वैल्यू पर आपसे जीएसटी वसूला जाएगा, क्योंकि इस पर मार्जिन ज्यादा मिलेगा।