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आज का साक्षात्कार: डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से सात फीसदी तक सस्ती होगी माल ढुलाई

Mon, 25 Nov 2019 06:28 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अनुराग सचान - फोटो : twitter
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मालगाड़ियों की समयबद्ध और तेज गति से आवागमन के लिए विकसित किए जा रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के दो हिस्सों पर अगले महीने से परिचालन शुरू होगा। इससे माल ढुलाई पांच से सात फीसदी सस्ती होगी। ट्रेनों की लेटलतीफी पर भी लगाम लगेगी। यह सब कैसे संभव होगा, इस पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ  इंडिया (डीएफसीसीआई) के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान से बातचीत की। पेश है अंश :

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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों गलियारों से रेल यात्रियों को किस प्रकार फायदा होगा?

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दोनों गलियारों से रेलवे के सामान्य यात्रियों को भी फायदा होगा। अभी यात्री गाड़ियां 100 या 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, लेकिन उसी पटरी पर मालगाड़ियों की रफ्तार 25 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा है। इससे यात्री गाड़ियों की भी गति घट जाती है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तैयार होने के बाद सभी मालगाड़ियां हमारी पटरी पर शिफ्ट हो जाएंगी। इसके बाद यात्री गाड़ी पूरे मार्ग में 100-125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भरेगी। इससे देश के सबसे व्यस्त दिल्ली-कोलकाता रेलमार्ग पर यात्री गाड़ियों की रफ्तार बढ़ जाएगी। बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर से आने वाली गाड़ियां भी लेटलतीफी की शिकार नहीं होंगी।

डीएफसीसीआई ने दोनों गलियारों में एक-एक खंड पूरा कर लिया है। ये कब तक राष्ट्र को समर्पित होंगे?

पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में खुर्जा से भदान तक 194 किलोमीटर का हिस्सा बन कर तैयार हो चुका है। इस पर ट्रायल रन चल रहा है। इसी दौरान इस पर हमने करीब 400 मालगाड़ियां चलाकर देख लिया है। उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा गया है। इस बीच, पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में रेवाड़ी से अजमेर के पास मदार तक का 351 किलोमीटर का हिस्सा भी पूरा हो गया है। ट्रायल रन शुरू होने वाला है। हमारी योजना है कि प्रधानमंत्री से वक्त मिलने के बाद एक ही साथ दोनों गलियारों के खंड राष्ट्र को समर्पित कर दिए जाएं।


इनके शुरू होने के बाद उद्योग और कारोबार जगत की परिवहन की लागत घट जाएगी?

एक अध्ययन के मुताबिक, यदि उद्योग जगत का माल कम समय में गंतव्य तक पहुंचे तो उनकी लागत पांच फीसदी घट जाती है। रेलवे में अभी तक यात्री गाड़ियों के लिए ही टाइम-टेबल है। मालगाड़ियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए दिल्ली से मुंबई तक माल पहुंचने में दो-तीन लग जाते हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू होने के बाद हम उस पर टाइम-टेबल के मुताबिक मालगाड़ी चलाएंगे और दिल्ली से मुंबई तक 24 घंटे में माल पहुंचाएंगे। ऐसा होने से उद्योग जगत की लागत में पांच से सात फीसदी तक की कमी अपने आप आ जाएगी। यही नहीं, जब समय से माल पहुंचेगा तो ढेर सारे उद्योगों को कच्चे माल के स्टॉक पर ज्यादा पूंजी नहीं फंसानी पड़ेगी।

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अभी तो आपने दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में महज दो खंड को ही पूरा किया है। शेष खंड कब तक बनेंगे?

हमने दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर हर खंड के लिए एक लक्ष्य तय कर दिया है। पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर भदान से कानपुर के पास भाउपुर तक के हिस्से को 30 नवंबर, 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि भाउपुर से मुगलसराय तक के हिस्से को 31 दिसंबर, 2020 तक पूरा कर लेंगे। मुगलसराय से सोन नगर तक का हिस्सा पहले से ही तैयार है। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में मदार से पालनपुर के हिस्से को 31 मार्च, 2020 तक पूरा कर लेंगे। यदि दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के संपूर्ण हिस्से की बात करें तो हम 2021 में इसे पूरी तरह से चालू कर देंगे। उसके बाद बिहार में सोननगर से कोलकाता के पास डानकुनी तक का हिस्सा बचेगा। इसे सरकारी-निजी-भागीदारी (पीपीपी) फॉर्मूले पर बनवाने का निर्णय लिया गया है। उस पर भी काम चल रहा है। वहां करीब 87 फीसदी भूमि का अधिग्रहण हो गया है। हम उसे दो हिस्सों में बांटकर बना रहे हैं और उसके एक हिस्से का आरएफपी कुछ ही दिनों में जारी किया जाएगा।


डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 105 डिब्बों की मालगाड़ी चलेगी और करीब 10,000 हॉर्सपावर के इंजन होंगे। इसके लिए आपको ट्रैफिक कंट्रोल तकनीक भी अत्याधुनिक रखनी होगी। इस दिशा में क्या तैयारी है?

इसे डिजाइन करते समय ही तय कर दिया गया था कि इस पर हैवी हॉल मालगाड़ी चलेगी। रेलवे में आमतौर पर 45 से 58 डिब्बों की मालगाड़ी चलती है और इंजन 5,000 हॉर्सपावर तक के हैं। हमारे यहां 105 डिब्बों की मालगाड़ी चलेगी। इस पर एक बार में13,000 टन माल ढुलाई होगी। इसे चलाने के लिए हमने 9,000 से 11,000 हॉर्सपावर का इंजन लाने का फैसला किया है। जाहिर है कि इसे चलाने के लिए हमें वैश्विक स्तर की यातायात नियंत्रण प्रणाली की जरूरत होगी। हम अपने परिचालन के लिए ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) लगा रहे हैं, जिसका उपयोग दिल्ली मेट्रो में होता है। इससे ऑटोमेटिक ट्रेन परिचालन संभव होगा और कोहरे में भी 100 किलोमीटर की रफ्तार से मालगाड़ी चलाने में दिक्कत नहीं आएगी। यही नहीं, हमने पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर प्रयागराज में ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर बनाया है, जिसमें दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वीडियो वॉल बनाया गया है। वहां उसी पर समस्त परिचालन दिखेगा।

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