लागत महंगाई जुलाई 2014 के बाद सबसे तेज
कीमत के मोर्चे पर लागत की महंगाई समग्र तौर पर तेजी से बढ़ी, हालांकि सेवा प्रदाता कंपनियां कीमत के मामले में संवेदनशील उपभोक्ताओं तक उच्च लागत खर्च को पूरी तरह से पहुंचा पाने में नाकाम रहे। डोढिया ने कहा कि समग्र लागत खर्च जुलाई 2014 के बाद सबसे तेजी से बढ़ा और कमजोर रुपया तथा तेल की ऊंची कीमतों के बीच महंगाई उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति को और सख्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है। जून में रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई के अपने अनुमान को 0.30 फीसदी बढ़ा दिया था और नीतिगत रुख को निरपेक्ष रखते हुए भी मुख्य ब्याज दर (रेपा दर) को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया था।
समग्र अर्थव्यवस्था में भी तेजी
इस बीच मौसमी रूप से समायोजित निक्केई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स मई के 50.4 से बढ़कर जून में 53.3 पर पहुंच गया। यह इंडेक्स उत्पादन तथा सेवा दोनों ही क्षेत्रों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस इंडेक्स की रीडिंग में अक्तूबर 2016 के बाद सबसे तेज छलांग दर्ज की गई है, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था में तेजी से विस्तार होने का पता चलता है।
डोढिया ने कहा कि पीएमआई आंकड़े से अक्तूबर 2016 के बाद समग्र अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य में सर्वोत्तम सुधार का पता चलता है, जिसमें उत्पादन और सेवा उद्योग दोनों में बेहतरीन विकास का मुख्य योगदान रहा है। एजेेंसी