फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

35 के हैं तो नौकरी जाने का खतरा सबसे ज्यादा!

Tue, 07 Mar 2017 02:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
भारतीय आईटी सेक्टर में काम करने वाले मिड लेवल के कर्मचारियों के लिए चिंता करने वाली खबर है। इकॉनमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, ये कंपनियां खुद को ऑटोमेशन और नई टेक्नॉलजी के हिसाब से ढालने में लगी हुई हैं। 
विज्ञापन


मिड लेवल की कंपनियों में करीब 14 लाख कर्मचारी हैं। उनके पास 8 से 12 साल का अनुभव है और उनकी सेलरी 12 से 18 लाख रुपए सलाना है। बताया जा रहा है कि री-स्किलिंग और री-स्ट्रक्चरिंग का असर इन्हीं पर है। आमतौर पर इनकी उम्र 35 साल के आस-पास ही होती है।

ईटी को पिछले साल दिए एक इंटरव्यू में इन्फोसिस के सीईओ विशाल सिक्का ने कहा था कि कंपनियां कंसल्टेंट्स पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनका साइज काफी बड़ा है। इसके बाद मैकिंजी जैसी कंपनियां कहती हैं कि मिडिल मैनेजमेंट धाराशायी हो चुका है। वे अपना निशाना मिडिल मैनेजमेंट को ही बनाती हैं। जबकि, सच यह है कि मिडिल लेवल मैनेजमेंट का बाहरी दुनिया से कोई सरोकार नहीं होता।
विज्ञापन

 
Trending Videos
विज्ञापन

मिडल मैनेजमेंट के लिए बदलाव सबसे मुश्किल होता है

डेमो पिक
भारतीय आईटी सेक्टर में मिडिल मैनेजमेंट पारंपरिक रूप से पीपल मॉडल और एफिशंट डिलीवरी पर ही आधारित रहता है। मिडिल मैनेजमेंट इसमें सबसे कमजोर कड़ी है। सीनियर्स की मुलाकात क्लाइंट्स से होती है, जिससे उन्हें पता होता है कि वे क्या सोच रहे हैं और उनके दिमाग में क्या चल रहा है। वहीं निचले मैनेजमेंट के कर्मचारी नई चीजों को आसानी से सीखते हैं और कंपनी के मुताबिक ढाल लेते हैं। इससे अलग मिडल मैनेजमेंट के लिए बदलाव सबसे मुश्किल होता है।


कैपेजिमिनी आईबीएम के कॉग्निटिव कंसल्टिंग टूल वॉट्सन की मदद से प्रोजेक्ट के लिए कर्मचारियों को तैनात कर रहा है। ये काम 10 साल का तजुर्बा रखने वाले कर्मचारियों को दिया जाता है। इससे अतिरिक्त मिडल मैनेजमेंट की सेलरी हाइक पर भी दबाव है। टेक महिंद्रा ने उन कर्मचारियों का सैलरी रिवीजन रोक दिया है, जो 6 साल से अधिक समय से उसके साथ काम कर रहे हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें