भारतीय आईटी सेक्टर में काम करने वाले मिड लेवल के कर्मचारियों के लिए चिंता करने वाली खबर है। इकॉनमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, ये कंपनियां खुद को ऑटोमेशन और नई टेक्नॉलजी के हिसाब से ढालने में लगी हुई हैं।
मिड लेवल की कंपनियों में करीब 14 लाख कर्मचारी हैं। उनके पास 8 से 12 साल का अनुभव है और उनकी सेलरी 12 से 18 लाख रुपए सलाना है। बताया जा रहा है कि री-स्किलिंग और री-स्ट्रक्चरिंग का असर इन्हीं पर है। आमतौर पर इनकी उम्र 35 साल के आस-पास ही होती है।
ईटी को पिछले साल दिए एक इंटरव्यू में इन्फोसिस के सीईओ विशाल सिक्का ने कहा था कि कंपनियां कंसल्टेंट्स पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनका साइज काफी बड़ा है। इसके बाद मैकिंजी जैसी कंपनियां कहती हैं कि मिडिल मैनेजमेंट धाराशायी हो चुका है। वे अपना निशाना मिडिल मैनेजमेंट को ही बनाती हैं। जबकि, सच यह है कि मिडिल लेवल मैनेजमेंट का बाहरी दुनिया से कोई सरोकार नहीं होता।