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टूट सकता है टाटा-मिस्त्री परिवार का 70 साल पुराना संबंध, मिस्त्री को देने पड़ सकते हैं 1.40 लाख करोड़ रुपये

Wed, 23 Sep 2020 04:13 PM IST
अमर शर्मा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रतन टाटा, साइरस मिस्त्री - फोटो : For Reference Only
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Shapoorji Pallonji Group (शारपूजी पलोनजी समूह) (एसपी समूह) यानी मिस्त्री परिवार ने कहा है कि अब समय आ गया है कि Tata Sons (टाटा संस) से बाहर निकला जाए। जिसके बाद 70 वर्षों पुराना यह रिश्ता खत्म हो जाएगा, जिसमें पिछले कुछ वर्षों के दौरान खटास आ गई थी। 

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एसपी समूह ने एक बयान में कहा, "70 वर्षों का शापूरजी पलोनजी-टाटा का संबंध आपसी विश्वास, सद्भावना और मित्रता पर आधारित था।" 



कंपनी ने कहा, "शपूरजी पलोनजी समूह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि टाटा ग्रुप से अलग होना, इस निरंतर मुकदमेबाजी का आजीविका और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव के कारण आवश्यक है।" इसका मतलब यह है कि एसपी समूह, जो अपनी दो निवेश फर्मों के जरिए टाटा संस में 18.4 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है, अपनी हिस्सेदारी बेचने और कंपनी से बाहर जाने के लिए तैयार है।

एसपी समूह ने कहा है कि वह टाटा संस से बाहर निकल जाएगा, बशर्ते उसे जल्द और न्यायपूर्ण समाधान मिल जाए। इस बीच टाटा समूह मिस्त्री परिवार की टाटा संस में 18.5 फीसदी हिस्सेदारी को खरीदने के लिए तैयार हो गया है। 
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कब शुरू हुआ विवाद 
सुप्रीम कोर्ट में दोनों समूहों के वकीलों ने विवाद को जल्द सुलझाने के लिए प्रस्ताव दिया है। जिसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह विवाद जल्द सुलझ जाएगा। बता दें कि 2016 में यह विवाद शुरू हुआ जब पलोनजी मिस्त्री के बेटे सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाया गया था। तभी से दोनों समूहों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने National Company Law Appellate Tribunal (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) के सायरस मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद बहाल करने के आदेश पर रोक लगा दी थी। 

सायरस को हटने की वजह
टाटा संस के मुताबिक कि सायरस के कार्यकाल के दौरान ऐसे कार्य बार-बार हुए जो टाटा समूह के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थे। इस वजह से सायरस मित्री बोर्ड का विश्वास खो चुके थे। टाटा समूह का नेतृत्व करने के लिए उनकी क्षमताओं पर भरोसा खत्म हो चुका था। 

मिस्त्री का पक्ष
टाटा समूह के आरोपों पर सायरस मिस्त्री का कहना था कि टाटा संस किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और ना ही ट्रस्ट के ट्रस्टियों का है। मिस्त्री का आरोप है कि समूह में सभी अधिकार हाई कमांड के पास थे जो कि गलत हैं। उनका कहना है कि टाटा ट्रस्ट के गवर्नेंस को और ज्यादा जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समूह के गवर्नेंस को सुधारने के लिए हस्तक्षेप करे। 

मिस्त्री को देने पड़ सकते हैं 1.40 लाख करोड़
टाटा समूह को टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18.4 फीसदी हिस्सेदारी को खरीदने के लिए लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। जून 2020 की कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार टाटा संस की कुल नेटवर्थ 7,80,778.2 करोड़ रुपये है। यह नेटवर्थ कंपनी के पास मौजूदा शेयर होल्डिंग से आती है। मिस्त्री परिवार के 18 फीसदी शेयरों की कीमत 1.40 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम रकम कई अन्य मूल्यांकनों के बाद तय होगी। 

इसलिए खत्म करना चाहते हैं विवाद
एसपी समूह द्वार विभिन्न कोषों से 11,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। समूह ने कनाडा के एक चर्चित निवेशक से टाटा संस में अपनी 18.4 फीसदी हिस्सेदारी में से हिस्से के लिए पहले चरण में 3,750 करोड़ रुपये का समझौता किया है। कनाडा के निवेशक के साथ एसपी समूह द्वारा समझौता किए जाने के एक दिन बाद टाटा संस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

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