सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को कोरोना के मद्देनजर कर्ज अदायगी के स्थगन की अवधि का ब्याज वसूलने के निर्णय पर फिर से विचार करने के लिए कहा है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि हजारों करोड़ रुपये एनपीए (डूबे हुए कर्ज ) में चले जाते हैं, लेकिन आप लोगों से ब्याज ले रहे हैं।
पीठ ने कहा कि अगर कर्ज अदायगी को निलंबित करने का निर्णय लिया गया है तो अथॉरिटी को यह देखने की जरूरत है कि इसका वास्तविक लाभ लोगों को मिल रहा है या नहीं? इस पर मेहता ने कहा कि सरकार और आरबीआई को 133 करोड़ जमाकर्ताओं की चिंता है। अगर ब्याज न लिया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ब्याज माफी से बैंकिंग सिस्टम में वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी और जमाकर्ताओं के हितों को चोट पहुंचेगी। मालूम हो कि 27 मार्च को आरबीआई ने सर्कुलर जारी कर ईएमआई में तीन महीने के लिए छूट दी थी और बाद में यह छूट और तीन महीने और बढ़ा दी गई थी।