फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Startup: क्रिएटर्स-इन्फ्लुएंसर्स को नहीं मिल रही पेमेंट्स, फंडिंग की कमी के कारण बंद हो रहे हैं स्टार्टअप

Tue, 27 Jun 2023 05:34 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

स्टार्टअप के बिगड़े हाल का नुकसान क्रिएटर्स-इंफ्लूएंसर को भी हो रहा है, जिनका पैसा कई स्टार्टअप नहीं चुका पा रहे हैं। 6.5 करोड़ डॉलर के निवेश वाले स्टार्टअप ट्रेल ने अपने क्रिएटर्स को प्रशिक्षण देकर न्यूनतम भुगतान का वादा किया था।
विज्ञापन
Startup
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी की करीब 4 साल तक प्रायोजक रही एडटेक स्टार्टअप बायजू अपने कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड में पैसे जमा नहीं कर पा रही है। मार्च, 2022 में 2,200 करोड़ डॉलर के मूल्यांकन के साथ दुनिया की सबसे बड़ी एडटेक स्टार्टअप का दर्जा हासिल कर चुकी इस कंपनी के निवेशकों में खलबली मची है। भारत के बढ़ते स्टार्टअप क्षेत्र की कुछ महीनों पहले तक पहचान रही यह कंपनी अकेले वित्तीय संकट से नहीं गुजर रही है, बल्कि कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लूएंसर की नई उभरती अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई स्टार्टअप कंपनियां भी लड़खड़ाती दिख रही हैं। फंडिंग में गिरावट के कारण कई बंद हो चुकी हैं।

ट्रैक्सएन के अनुसार, देश में जून, 2023 तक 2.53 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं। इनमें करीब 2,000 कंपनियां क्रिएटर्स के लिए बनी हैं। लेकिन, बाकी क्षेत्रों के स्टार्टअप की तरह इनकी फंडिंग में गिरावट आ रही है। जनवरी में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय स्टार्टअप में निवेश 52 फीसदी घटा है। मुंबई में 26 फीसदी और बंगलूरू में 46 फीसदी गिरावट आई है। 2022 में 2,400 स्टार्टअप बंद हुए, जो 2021 से दोगुना है। 2023 की पहली तिमाही में भी गिरावट जारी है। कंटेंट क्रिएटर्स से जुड़े स्टार्टअप को भी इससे नुकसान हो रहा है।

स्टार्टअप, जो बंद हुए या बिक गए

  1. फ्रंटरो : इसने 1.80 करोड़ डॉलर जुटाए। आज बिकने को तैयार है। 90 फीसदी कर्मचारियों को निकाल चुकी है।
  2. कॉर्नर : डिजिटल क्रिएटर्स के लिए बना फिनटेक मंच सवा साल से निष्क्रिय है। इसकी वेबसाइट भी नहीं खुल रही है।
  3. पिक्सल कार्ड्स : क्रिएटर्स के लिए क्रेडिट कार्ड बनाने वाली स्टार्टअप कंपनी बंद हो चुकी है। वजह, आरबीआई की ओर से भुगतान नियम बदलने से लेनदेन शुल्क लग रहा था।
  4. सीन्स : फंडिंग घटने से इसके एप की हालत बिगड़ी। अनअकैडमी के ग्राफी ने इसका अधिग्रहण कर लिया।
  5. प्रोटोन : इसका एप 90 लाख डॉलर जुटाने के 6 माह बाद ही बंद हो गया। स्ट्रीमएंकर व पेनसर्कल भी बंद हो चुके हैं।
  6. 2.55 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाने वाली बुलबुल, 1.76 करोड़ फंडिंग जुटाने वाली सिमसिम, 1.20 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाने वाली कीको को दूसरी कंपनियां अधिगृहित कर चुकी हैं।

क्रिएटर्स की अर्थव्यवस्था

विज्ञापन

इन स्टार्टअप को तीन श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी में वीडियो, लेख, तस्वीरें, ऑडियो सर्च करने में यूजर्स की मदद करने वाले मंच हैं। यहां पहले ही गूगल, मेटा जैसे बड़े खिलाड़ी हैं। दूसरी श्रेणी में कमाई ट्रैक करने और यूजर्स प्रबंधन में क्रिएटर्स की मदद करने वाले मंच हैं। वे वित्तीय लेनदेन और प्रमोशन से ज्यादा जुड़े हैं। तीसरी श्रेणी में क्रिएटर्स के लिए बने टूल्स हैं। ये स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स और मॉडरेटरों को तकनीकी सपोर्ट दे रहे हैं ताकि वे काम से पैसा बना सकें।

नहीं मिल रहे पैसे
इन स्टार्टअप के बिगड़े हाल का नुकसान क्रिएटर्स-इंफ्लूएंसर को भी हो रहा है, जिनका पैसा कई स्टार्टअप नहीं चुका पा रहे हैं। 6.5 करोड़ डॉलर के निवेश वाले स्टार्टअप ट्रेल ने अपने क्रिएटर्स को प्रशिक्षण देकर न्यूनतम भुगतान का वादा किया था। लेकिन, पैसा नहीं चुका पाया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निकाल दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें