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रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने नहीं बदली भारत की रेटिंग, सुधार की उम्मीदों को झटका

Thu, 03 Nov 2016 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर (एसएंडपी) ने भारत के विकास परिदृश्य में कोई बदलाव किये बगैर इसे स्थिर रखा है। एजेंसी के इस कदम से रेटिंग में सुधार की उम्मीद को झटका लगा है। एसएंडपी ने भारत की रेटिंग ‘बीबीबी-ए-3’ पर बरकरार रखी है। साथ ही एसएंडपी ने कहा है कि अगले साल तक भारत की रेटिंग में बदलाव की उम्मीद नहीं है। इस बीच आर्थिक मामलों के सचिव, शक्तिकांत दास ने कहा है कि एसएंडपी के इस कदम से भारत को कोई दिक्कत नहीं होगी।
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एजेंसी ने वर्ष 2016 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। इसके अलावा आलोच्य अवधि में चालू खाते का घाटा वर्ष 2015 के 2.1 फीसदी के मुकाबले घटकर 1.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई की दर को 5 फीसदी के दायरे में रखने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।
एसएंडपी ने कहा है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर घटती है तो भारत की रेटिंग घट भी सकती है। 

रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा है कि अगर मौद्रिक नीति कमेटी अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती है तो रेटिंग में और भी गिरावट हो सकती है। विदेशी निवेश में गिरावट होने पर भी यही खतरा है। हालांकि एजेंसी ने कहा है कि अगर सरकारी कर्ज की राशि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 60 फीसदी से कम हो जाती है तो रेटिंग बढ़ भी सकती है। यही नहीं, सुधार की प्रक्रिया जारी रहने एवं देश की वित्तीय स्थिति बेहतर होने पर भी भारत की रेटिंग बढ़ेगी। एसएंडपी के मुताबिक, वर्ष 2019 तक भारत के सरकारी बैंकों में 4,500 करोड़ डॉलर की पूंजी डालने की जरूरत होगी। 
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शक्तिकांत दास ने एसएंडपी की रेटिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे भारत के हित पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैश्विक निवेशक इस बात को समझ रहे हैं कि भारत की साख अंडर रेटेड है। यहां आर्थिक सुधार की दिशा में मजबूत कदम उठ रहे हैं और इस दिशा में सरकार आगे भी काम करती रहेगी। 
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