महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सैनेटरी नैपकिन के निर्माण में प्रयोग में लगने वाले पल्प को सरकार चीन से नहीं मंगाएगी। इसके उत्पादन को बढ़ावा देने की मुहिम के मद्देनजर सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों से संपर्क साधा है। साथ ही केले से पल्प बनाने की विधि का सुझाव दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना (आईटी) मंत्रालय के सर्व सेवा केंद्रों के तहत सैनेटरी नैपकिन बनाने की यूनिट लगाने पर हुई बैठक में पल्प की कमी का मुद्दा उठा। आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को अधिकारियों ने बताया कि नैपकिन बनाने वाली कंपनियों को देश में पल्प नहीं मिल पाता।
ऐसे में इस मुहिम को बढ़ावा देने के लिए चीन से पल्प मंगाया जा सकता है। हालांकि, यह राय बैठक में अस्वीकार कर दी गई और देश में पल्प बनाने वाली निजी कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने को कहा गया। सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय को प्रधानमंत्री ने हर ग्रामीण ब्लॉक में स्थित केंद्र के तहत नैपकिन की एक यूनिट लगाने को कहा है। इसके चलते मंत्रालय विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है।
आईटी मंत्रालय द्वारा महिला उद्यमियों को भी इसकी यूनिट लगाने के लिए आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ऐसी यूनिट लगाने में सहूलियत मुहैया कराने की घोषणाएं भी करेगी। हालांकि नैपकिन बनाने के लिए जरूरी सामग्री को पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराना मंत्रालय की प्राथमिकता है, जिसमें पल्प की कमी एक अड़चन के तौर पर सामने आई है। गौरतलब है कि यह मुहिम महिलाओं को स्वस्थ जीवन मुहैया कराने और रोग मुक्त रखने के लिए सरकार ने शुरू किया है।