देश में भारतीय मानक ब्यूरो (बीएसआई) के हिसाब से किसी औद्योगिक उत्पाद को आईएसआई मार्क सत्यापन के बाद ही बेचा जा सकता है लेकिन पानी साफ करने वाले रिवर्स ओसमोसिस (आरओ) फिल्टर की बिक्री बिना किसी आईएसआई मार्क के ही हो रही है।
आरओ मशीन की बिक्री करने वाली कंपनियों पर यह आरोप नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में गैर सरकारी संस्था फ्रैंड्स ने याचिका दाखिल कर लगाया है। संस्था की मांग है कि बिना आईएसआई मार्क वाले आरओ फिल्टर की बिक्री पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। इस मामले पर एनजीटी 13 अप्रैल को विचार करेगा।
एनजीटी की पीठ करेगी सुनवाई
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ को इस मामले पर विचार करना है। गैर सरकारी संस्था फ्रैंड्स ने आरोप लगाया है कि बिना आईएसआई मार्क वाले आरओ मशीनों के कारण लोगों की सेहत दांव पर है।
कंपनियां आरओ मशीनों की बिक्री में भारत मानक ब्यूरो के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। संस्था ने पीठ से मांग की है कि वे भारत मानक ब्यूरो को निर्देश दें कि सभी आरओ वाटर प्यूरीफायर में जीरो डिस्चार्ज नियमों का पालन होना चाहिए।
भारत मानक ब्यूरो ने पेयजल के लिए विभिन्न मानक तय किए हैं जबकि आरओ मशीनों की बिक्री करने वाली कंपनियां ग्राहकों को टोटल डिजावल्ड सॉलिड (टीडीएस) की अधिकतम सीमा के अलावा किसी तरह की न्यूनतम सीमा नहीं बताती हैं।
संस्था ने ऐसी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की है। मालूम हो कि एनजीटी ने हाल ही में आरओ फिल्टर मशीनों से जल बर्बादी के मामले में ही केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय , केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।