शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल 22 पैसे प्रति लीटर और डीजल 28 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। दिल्ली में पहली बार डीजल 70 रुपये के पार पहुंचा है। शुक्रवार को दिल्ली में एक लीटर डीजल 70.21 रुपये का मिल रहा है। पिछले एक महीने में दिल्ली में पेट्रोल 2.27 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.46 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है।
पेट्रोल-डीजल में आग
शहर पेट्रोल डीजल
मुंबई 85.93 74.54
चेन्नई 81.58 74.18
कोलकाता 81.44 73.06
पेट्रोल के बढ़ते दाम का असर अब सीधे आम आदमी पर पड़ रहा है। पिछले एक वर्ष में पेट्रोल व डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। बृहस्पतिवार को पेट्रोल की कीमत 79 रुपये प्रति लीटर से भी अधिक हो गई, जबकि डीजल की कीमत 71 रुपये तक पहुंच गई है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर न केवल भोग-विलासिता की वस्तुओं, बल्कि खाद्य पदार्थों पर भी पड़ रहा है। एक वर्ष में खाद्य पदार्थों के दाम भी लगभग दोगुने तक हो चुके हैं। सब्जियों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
डीजल व पेट्रोल के दाम तय करने का अधिकार मिलने से पेट्रोलियम कंपनियां मनमानी पर उतर आई हैं। ऐसे में घाटा दिखाकर रोजाना ही दाम बढ़ा दिए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत काफी कम है, लेकिन सरकार उस पर इतने टैक्स लगा देती है कि दाम आसमान छूने लगते हैं।
सरकार अक्तूबर से घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत में 14 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर सकती है। इससे सीएनजी और पीएनजी की कीमत तो बढ़ेगी ही, इसके कारण बिजली और यूरिया उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी।
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक प्राकृतिक गैस के अधिकतर घरेलू उत्पादकों को भुगतान की जाने वाली कीमत एक अक्तूबर से बढ़ाकर प्रति यूनिट (एमएमबीटीयू) 3.5 डॉलर की जा सकती है, जो अभी 3.06 डॉलर प्रति यूनिट है। एक यूनिट 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट की होती है।
देश में प्राकृतिक गैस की कीमत हर छह महीने पर फिर से तय की जाती है। यह कीमत अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे गैस सरप्लस देशों की औसत दरों के आधार पर तय की जाती है। सूत्रों ने कहा कि प्राकृतिक गैस कीमतों में संशोधन की घोषणा 28 सितंबर को हो सकती है। भारत अपनी आधी गैस जरूरतों के लिए आयात करता है और आयातित गैस की कीमत घरेलू गैस के मुकाबले दोगुने से भी अधिक पड़ती है।
प्रति यूनिट 3.5 डॉलर की दर एक अक्तूबर से अगले छह महीने तक के लिए रह सकती है और यह दर अक्तूबर 2015-मार्च 2016 अवधि के बाद सर्वाधिक होगी, जब यह दर 3.82 डॉलर प्रति यूनिट थी।
प्राकृतिक गैस महंगा होने से सीएनजी और घरों में पाइप से आपूर्ति होने वाली पीएनजी महंगी हो सकती है। इससे बिजली उत्पादन और उर्वरक तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी।