कच्चे तेल के भाव में आई गिरावट।
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भारतीय तेल कंपनियां रूस में फंसे 60 करोड़ डॉलर के अपने लाभांश से रूसी कच्चा तेल खरीदने की संभावनाएं तलाश रही हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के रूस पर लगाए प्रतिबंधों के कारण पैसा भारत नहीं लाया जा सका है।
अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया, भारत की शीर्ष-4 पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. की एक इकाई, ऑयल इंडिया लि. और ओएनजीसी विदेश लि. (ओवीएल) रूसी तेल एवं गैस क्षेत्रों में अपने निवेश से अर्जित लाभांश आय को नहीं ला सकी हैं। वह पैसा रूस में उनके बैंक खातों में पड़ा हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि एक विकल्प यह है कि रूसी बैंकों के खातों में पड़े पैसे को कच्चा तेल खरीदने वाली कंपनियों को कर्ज के रूप में दिया जा सकता है। ये कंपनियां भारत में ऋण चुका सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, हम इस कदम को लेकर कानूनी और वित्तीय प्रावधान देख रहे हैं। हम प्रतिबंधों के प्रति सचेत हैं। ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहते, जिससे किसी भी तरह के उल्लंघन का मामला बनता हो। भारत की क्रूड खरीद में रूस का हिस्सा 33% से अधिक है।