फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए रियल्टी क्षेत्र के लिए कैसा रहा 2020, नए साल में मांग बढ़ने की उम्मीद

Sat, 26 Dec 2020 11:45 AM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रॉपर्टी - फोटो : pixabay
विज्ञापन

कोरोना वायरस महामारी के कारण संकट में गुजरे साल 2020 के बाद रियल्टी उद्योग को 2021 से काफी उम्मीदें हैं। रियल्टी क्षेत्र को नए साल में मकानों की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। रियल्टी उद्योग वर्ष 2016 में नोटबंदी के बाद से ही अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा होने का प्रयास कर रहा है लेकिन वर्ष 2020 ने उसके इन प्रयासों पर जैसे पानी फेर दिया। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में मांग बुरी तरह प्रभावित हुई। अब उद्योग को 2021 से ही उम्मीदें हैं। 

विज्ञापन


बिक्री में 50 फीसदी तक की गिरावट
इस साल आवास और दफ्तरों के लिए जगह की बिक्री में 40 से 50 फीसदी तक गिरावट आई है। ऐसी स्थिति में रियल्टी उद्योग को संपत्ति के स्थिर दाम, बैंकों से आवास ऋण पर कम ब्याज दर, डेवलपर द्वारा दी जा रही विभिन्न प्रकार की छूट और मुफ्त तोहफे तथा कुछ राज्यों में स्टाम्प शुल्क दरों में की गई कमी से उद्योग को नए साल में मांग बढ़ने की उम्मीद है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिये देश में दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन लागू किया गया। यह लॉकडाउन करीब करीब दो महीने तक चला। इस दौरान आवास और कार्यालयों के लिए मांग में भारी गिरावट आई। हालांकि, डेवलपरों ने उपभोक्ता तक पहुंचने के लिए तेजी से डजिटल उपायों को अपनाना शुरू कर दिया था। 

इन शहरों में 1.38 लाख यूनिट रही आवास बिक्री
वर्ष के दौरान अप्रैल से लेकर सितंबर तक रियल्टी बाजार में सुस्ती छाई रही। अक्तूबर में त्योहारी मौसम शुरू होने के बाद ही बाजार में कुछ हलचल दिखाई दी। संपत्ति क्षेत्र की सलाहकार कंपनी एनारॉक द्वारा तेयार आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में देश के सात प्रमुख शहरों में कुल मिलाकर आवास बिक्री 1.38 लाख यूनिट रही जो कि इससे पिछले साल के मुकाबले 47 फीसदी कम रही। यह बिक्री दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई महानगर क्षेत्र, बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और कोलकाता में दर्ज की गई। 

विज्ञापन

महाराष्ट्र सरकार ने की स्टांप शुल्क में कमी
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मकानों की बिक्री पर स्टांप शुल्क में कमी करने से बिल्डरों के साथ-साथ खरीदार को भी काफी राहत मिली। इससे मुंबई और पुणे में रियल्टी क्षेत्र में मांग बढ़ाने में काफी मदद मिली। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई डेवलपर ने तो स्टांप शुल्क में कटौती के बाद जो शुल्क दर शेष रह गई थी उसे खुद ही वहन करने का फैसला किया। रियल्टी क्षेत्र की शीर्ष संस्था क्रेडाई के चेयरमैन जक्शय शाह ने 2020 के दौरान रियल्टी क्षेत्र के प्रदर्शन पर कहा कि पिछले कुछ सालों के दौरान यह क्षेत्र राजकोषीय और गैर-राजकोषीय सुधारों के कारण प्रभावित रहा है। 

जीएसटी, नोटबंदी अथवा रेरा इन सभी सुधारों का कहीं न कहीं रियल्टी क्षेत्र पर असर पड़ा है। शाह ने कहा, 'सुधारों की वजह से क्षेत्र पहले ही काफी दबाव में था उसके बाद कोविड-19 ने तो चीजों को और ज्यादा बिगाड़ दिया और यह क्षेत्र अब तक के सबसे बड़े संकट के दौर में पहुंच गया।' क्रेडाई के अध्यक्ष सतीश मागर ने कहा कि लॉकडाउन उठने के बाद मांग में कुछ सुधार आया है लेकिन यह अभी भी कोविड-19 से पहले की स्थिति में नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा, 'ऐसे संकेतक हैं जो कि क्षेत्र में सुधार आने की तरफ इशारा करते हैं लेकिन यह गति वांछित रफ्तार से कम है।' 

सरकार व RBI ने उठाए कईं कदम
सतीश मागर ने कहा कि सरकार ने और रिजर्व बैंक ने रियल्टी क्षेत्र में मांग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाये हैं लेकिन इनमें लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दूर नहीं किया गया। इसके लिए उन्होंने आगामी बजट में मांग और आपूर्ति पक्ष की तरफ हस्तक्षेप उपाय की मांग की है। नारेडको महाराष्ट्र की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंजू याग्निक ने कहा कि इस साल महाराष्ट्र द्वारा स्टांप ड्यूटी में छूट देना एक स्वागत योग्य कदम था, जिसने बाजार में अंतिम उपयोगकर्ता का उदय होते हुए देखा, पूरे भारत में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों में भी इसे दोहराया जाना चाहिए। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की वजह से परियोजनाओं को पूरा करने में हो रही देरी के मामले में राहत देते हुए सरकार ने परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा को छह से नौ माह बढ़ने की अनुमति दे दी है। 

सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदम
वहीं मध्यम आय वर्ग के लिए आवास ऋण के ब्याज पर दी जाने वाली सहायता का लाभ मार्च 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। सरकार ने प्रवासी और शहरी गरीबों को किराए पर मकान देने के लिए एक योजना शुरू की है वहीं ऋण पर एक बारगी कर्ज पुनर्गठन को भी मंजूरी दी गई है। अटकी पड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिये सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये की 'स्वामी' दबाव कोष की शुरुआत की। इसके तहत 4.5 लाख फ्लैट को पूरा किया जाना है। अब तक दस हजार करोड़ रुपये के निवेश को इसमें मंजूरी दी जा चुकी है। हालांकि, बिल्डरों का कहना है कि इसके लिए काफी सख्त पात्रता मानदंड रखे गए हैं। 

लीजिंग गतिविधि में 36 फीसदी की गिरावट
कार्यालयों की मांग का बाजार भी वर्ष के दौरान मंदी से बच नहीं सका। कार्यालय के लिए पट्टे पर स्थान देने की मांग 2020 में ढाई करोड से 2.70 करोड़ वर्गफुट रही जो कि एक साल पहले के 4.65 करोड़ वर्गुफट के मुकाबले कहीं कम है। संपत्ति सलाहकार कंपनी जे एलएल इंडिया ने यह जानकारी दी है। कई कंपनियों ने अपनी विस्तार योजनाओं को रोक दिया। कर्मचारी घर से ही काम कर रहे हैं इससे कार्यालय के लिए स्थान की मांग कम होनी ही थी। भारत में महामारी आते ही लीजिंग गतिविधि नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई और कंपनियों को अपने वर्कफोर्स को वर्क फ्रॉम होम करने पर मजबूर कर दिया। इसके कारण पहली छमाही में लीजिंग गतिविधि में 36 फीसदी की गिरावट आई। 
विज्ञापन

इस साल रियल एस्टेट क्षेत्र में हुए ये बड़े सौदे
वर्ष के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र में कुछ बड़े सौदे भी हुए। आएमजैड समूह ने बड़ी वाणिज्यिक संपत्ति को ब्रुकफील्ड को 14,500 करोड़ रुपये में बेचा। इसी प्रकार प्रेस्टीज समूह ने अपनी वाणिज्यिक संपत्ति को ब्लेकस्टोन को करीब दस हजार करोड़ रुपये में बेच दिया। रियल्टी क्षेत्र के अन्य घटनाक्रमों में इंडियाबुल्स रियल एस्टेट और एम्बेसी समूह ने अपनी परियोजनाओं का विलय करने का फैसला किया। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एलसीएलटी) ने कर्ज में फंसी जेपी इंफ्राटेक को अधिग्रहण करने की एनबीसीसी की बोली को मंजूरी दे दी, वहीं केंद्र ने संकटग्रस्त यूनिटेक का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इन घटनाक्रमों से अटकी पड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू होने से हजारों घर खरीदारों को राहत मली। 

2021 में वृद्धि की उम्मीद
नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि 2021 में रियल एस्टेट में वृद्धि को गति मिलेगी। हम विकास करने के लिए नए मार्ग देख रहे है जो भारत के अर्थव्यवस्था और वाणिज्य को बढ़ावा देंगे और इससे देश के रियल एस्टेट फैब्रिक पर असर होगा।'
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें