बजट आने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में जो खुशी का माहौल छाया हुआ था, वो कुछ दिनों के बाद ही काफूर हो गया है। इसका कारण है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में बदलाव नहीं करना, जिससे होम लोन पर लगने वाली ब्याज दर में कमी होने की उम्मीद अगले दो महीने तक नहीं है।
अब आरबीआई जब अप्रैल में अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा, तब जाकर के कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नोटबंदी के बाद बैंकों के पास है पर्याप्त डिपॉजिट
नोटबंदी के बाद बैंकों के पास रुपयों की पर्याप्त तरलता है और रेट कट कर्जदारों को राहत देता। पिछले साल दिसम्बर की समीक्षा नीति की भांति इस बार भी आरबीआई का रवैया सामान्य रहा है।
शीर्ष बैंक से उम्मीद जा रही थी कि रेट कट करने से रियल एस्टेट मार्केट को राहत की सांस लेने का मौका मिलेगा, लेकिन इस बार भी यह उम्मीद पूरी नहीं हो पायी। बजट के बाद और इस साल की पहली बाई-मंथली पालिसी रिव्यू होने के साथ ही यह इस वित्त वर्ष की छठी और आखिरी समीक्षा नीति है।