यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसरख गांव में एक तरफ किसान गिरते भू-जल स्तर और सूखे की मार से परेशान हैं, वहीं बिल्डर्स के जरिये इलाके में अंधाधुंध तरीके से अवैध भू-जल दोहन करने और इलाके में गहरी मिट्टी की खुदाई की जा रही है।
ऐसी ही एक याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित बिल्डर कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी का यह फैसला किसान संघर्ष समिति की ओर से दाखिल याचिका पर आया है।
याची मुकेश कुमार ने दावा किया था कि ग्रेटर नोएडा स्थित कैपिटल एथीना बिल्डर्स बिसरख के प्रोपराइट सिद्धार्थ शर्मा और उनके पार्टनर नवीन राणा ने अवैध तरीके से गांव में 40 फीट गहरी मिट्टी की खुदाई की साथ ही निर्माण के लिए अवैध तरीके से भू-जल का दोहन कर हिंडन नदी को भी प्रदूषित किया है।
संबंधित मामले पर जुर्माने का यह फैसला जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया है। याची का यह भी आरोप था कि संबंधित बिल्डर की वजह से कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। याची ने बेंच से मांग की थी कि वह बिल्डर्स को इन गतिविधियों के लिए रोकें साथ ही प्राधिकरणों को इलाके में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने के लिए निर्देश जारी करें।