ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप (आईआईटी) का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने जा रहा है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएमआईसीडीसी) के सहयोग से विकसित किए जाने वाले आईआईटी के निर्माण कार्य के लिए ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट व कमीशन) कांट्रैक्टरों को नियुक्त कर लिया गया है और उन्हें ठेके दिए जाने के संबंध में पत्र भी सौंप दिए गए हैं।
आईआईटी के कार्य को अमल में लाने के लिए प्रोग्राम मैनेजर नियुक्त करने के लिए जल्द ही फिर से टेंडर जारी किया जा रहा है। बाकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। आईआईटी की यह परियोजना पिछले कई सालों से विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
ग्रेटर नोएडा के अजायबपुर रेलवे स्टेशन के पास 747 एकड़ जमीन पर आईआईटी को विकसित किया जाएगा। इस टाउनशिप में सूचना प्रौद्योगिकी व जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना पर 1,714 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है। आईआईटी को विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार व डीएमआईसीडीसी के बीच ज्वॉइंट वेंचर किया गया है। डीएमआईसी के मुताबिक आईआईटी को पूर्ण रूप से 30 सालों में छह चरणों में विकसित किया जाएगा।
एक चरण की अवधि पांच साल की होगी। डीएमआईसी के अनुमान के मुताबिक, 30 सालों में ग्रेटर नोएडा के आईआईटी में 33,000 करोड़ से अधिक रुपये के निवेश का अनुमान है जिससे बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन होगा। 20 जनवरी, 2014 को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रीयल टाउनशिप को विकसित करने की योजना को मंजूरी दी थी। आरंभ में इस टाउनशिप का नाम हाई-टेक सिटी रखा गया था।
टाउनशिप के लिए जमीन प्रदेश सरकार मुहैया कराएगी जिसे बाद में ज्वॉइंट वेंचर के तहत बनने वाले स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। डीएमआईसी के मुताबिक पाली व चोलास गांव के पास लगे सब स्टेशन से आईआईटी में बिजली की आपूर्ति करने का प्रस्ताव है। वहीं आईआईटी को स्वच्छ गंगा पानी की आपूर्ति की जाएगी। डीएमआईसीडीसी के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के ज्वॅाइंट वेंचर केतहत ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में कॉमर्शियल कार्गो हब, रेलवे स्टेशन, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम आदि को विकसित किया जाना है।