मकान खरीदारों ने आईबीसी में बदलाव के जरिये अधिकार सीमित किए जाने का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि मौजूदा कानून के तहत वित्तीय कर्जदाता का दर्जा मिला हुआ है, जिसे कानून में संशोधन कर कमजोर बनाने की तैयारी है।
एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि बिल्डर मकान खरीदारों को सशक्त बनाने और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार लाने के सरकार के प्रयासों को विफल करने में लगे हैं। हम दिवालिया कानून में ऐसे किसी भी संशोधन का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी बिल्डर को अपने भले के लिए यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि पीड़ित मकान खरीदार उसके खिलाफ किस अदालत में शिकायत करता है। अगर बिल्डरों की मांग पर ऐसा कोई कदम उठाती है, तो इससे सुधार की ओर बढ़ रहे रियल एस्टेट क्षेत्र को झटका लगेगा।
संगठन ने कहा कि आईबीसी के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, एक अकेला कर्जदाता (वित्तीय/परिचालन) जिसका बकाया 1 लाख रुपये से ज्यादा हो, वह किसी भी कॉरपोरेट कंपनी या संस्था को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में घसीट सकता है। ऐसे में एक अकेले मकान खरीदार को कैसे शिकायत करने से रोका जा सकता है, जिसकी बकाया राशि कानून में तय राशि से कहीं ज्यादा होती है।
बिल्डर्स ने आईबीसी में संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि एक मकान खरीदार की शिकायत तब तक स्वीकार नहीं की जाए, जब तक वह अन्य पीड़ित खरीदारों का समूह नहीं बनाता है। इस पर एफपीसीई ने कहा कि इस तरह की मांग पूरी तरह नाजायज है, क्योंकि इसका मतलब यह है कि किसी हत्यारोपी के खिलाफ कोई व्यक्ति तब तक शिकायत नहीं कर सकता है, जब तक वह उसी आरोपी से पीड़ित अन्य व्यक्ति की तलाश नहीं कर लेता है। लिहाजा पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कानून के तहत मकान खरीदारों के अधिकारों को कमजोर नहीं होने देंगे।