बढ़ा है बैंकों का विश्वास
ओमैक्स के मुख्य कार्यकारी एवं प्रतिनिधिमंडल में शामिल मोहित गोयल ने कहा कि रेरा और जीएसटी लागू होने के बाद सभी डेवलपर्स ने परियोजनाओं की डिलीवरी में कोई देरी नहीं की और वे कॉरपोरेट शैली में काम कर रहे हैं।
इससे लोन देने के मामले में बैंकों का विश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में जब रेरा एवं जीएसटी बिल्कुल सुव्यवस्थित हो जाएंगे और सौदेबाजी में पारदर्शिता आ जाएगी, तब बैंक डेवलपर्स को भूमि अधिग्रहण के लिए पूंजी देना शुरू कर देंगे।
तर्कसंगत हो गई हैं जमीन की कीमतें
गोयल का कहना है कि रेरा और जीएसटी जैसी सकारात्मक और विघटनकारी नीतियों से रियल एस्टेट उद्योग का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा समेकित हो गया है। आने वाले दशक में यह उद्योग और मजबूत होगा। वहीं, एटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गेतांबर आनंद ने कहा कि भूमि मालिक अब आकर्षक उद्यम मॉडल के लिए डेवलपर्स से संपर्क कर रहे हैं, जो अच्छा संकेत है।
उन्होंने कहा कि इन नीतियों द्वारा परिवर्तन से पिछले पांच साल में जमीन की कीमतें तर्कसंगत हो गई हैं। लेकिन वाणिज्यिक, आवासीय और औद्योगिक विकास के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली भूमि ढूंढना बड़ी चुनौती है।
मजबूत सरकार से बेहतर होगी उद्योग की स्थिति
आनंद ने विदेशी निवेशकों से सही डेवलपर के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया क्योंकि भारतीय रियल एस्टेट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। उन्होंने कहा कि यह उद्योग आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। अगर इस बार स्थायी और मजबूत सरकार बनती है तो अगला 10 साल भारतीय रियल एस्टेट से जुड़े किसी भी व्यक्ति के लिए एक सुनहरा दौर होगा। उनके मुताबिक, बैंक अगर अपने ब्याज दर को 12-15 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी के आसपास रखते हैं तो स्थिति और भी बेहतर होगी।