सभी डेवलपर आईटीसी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा रहे हैं, परिणामस्वरूप लोगों के मकान खरीदने की धारणा को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे डेवलपर बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी योजना जैसी अनोखी भुगतान योजना का सहारा ले रहे हैं, जिसमें उपभोक्ताओं को पजेशन मिलने तक ईएमआई अवकाश की सुविधा मिलती है।
सीबीआरई ने कहा कि जो परियोजनाएं एक जुलाई, 2017 से पहले लांच हुई हैं और निर्माण के उन्नत चरण में हैं, उन्हें आईटीसी के कारण उल्लेखनीय फायदा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि अधिकांश निर्माण सामग्री जीएसटी लागू होने से पहले खरीदी गई होगी। निर्माण के प्रारंभिक चरण वाली निर्माणाधीन परियोजनाएं जीएसटी व्यवस्था के तहत आईटीसी के हिसाब से अपनी कीमतों को समायोजित कर सकते हैं।
जीएसटी से निवेश परिदृश्य में सुधार
भारतीय रियल एस्टेट पर जीएसटी के एक साल के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए सीबीआरई के भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के चेयरमैन अंशुमान मैगजीन ने कहा कि विभिन्न नीतिगत सुधारों जैसे जीएसटी व रेरा का लागू होना तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ढील ने देश में निवेश परिदृश्य को उल्लेखनीय रूप से आसान व सुव्यवस्थित किया है।
निवेश के लिहाज से कार्यालय तथा रिहायशी सेगमेंट की प्रमुखता बनी हुई है, वहीं वैकल्पिक क्षेत्र जैसे रिटेल तथा वेयरहाउसिंग की भी मांग बढ़ी है। मैगजीन ने कहा कि जीएसटी लागू होने के साथ ही वेयरहाउसिंग क्षेत्र में घरेलू के साथ-साथ राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने दिलचस्पी जताई है, जिसके परिणामस्वरूप बेहतर गुणवत्ता वाले तथा निवेश योग्य संपत्तियां सामने आई हैं।