फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिल्डर्स नहीं कर सकेंगे Buyers के साथ धोखाधड़ी, अर्बन मिनिस्ट्री देखेगी RERA से जुड़े सभी मामले

Sun, 17 Dec 2017 02:22 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
विज्ञापन
- फोटो : File Photo
विज्ञापन
घर खरीददारों को बड़ी राहत देते हुए और उन्हें बिल्डर द्वारा किसी तरह की धोखाधड़ी न हो, इसके लिए लिए केंद्र सरकार आगे आई है। अब से रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े सभी मामलों को शहरी विकास मंत्रालय देखेगा। मंत्रालय वो मामले देखेगा जो रेरा कानून के तहत आएंगे। 
विज्ञापन


कैबिनेट सचिवालय ने जारी किया आदेश
कैबिनेट सचिवालय ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा कि शहरी विकास मंत्रालय अब रेरा कानून से जुड़े सभी मामलों को देखेगा। रेरा रियल एस्टेट सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए कानून है, जिसके तहत किसी भी तरह के प्लॉट, अपार्टमेंट या फिर बिल्डिंग की खरीद-बिक्री को पारदर्शी तरीके से किया जा सके। इसमें बायर्स के हितों की रक्षा करने का प्रावधान भी है। 

रेरा के तहत आएंगे अभी चल रहे प्रोजेक्ट
घर खरीदने वालों को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि बिल्डरों के पहले से चल रहे प्रोजेक्ट भी रेरा कानून के दायरे में आएंगे। इससे पहले केवल वो ही प्रोजेक्ट रेरा कानून के दायरे में थे जो कि कानून के लागू होने के बाद शुरू हुए थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

पूरे देश में लागू होगा ये फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला पूरे देश में सभी बिल्डर्स पर लागू होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने रेरा को संवैधानिक मान्यता देते हुए कहा कि यह कानून घर खरीदने की प्रक्रिया को काफी पारदर्शी और तेज बनाएगा। 

बिल्डरों को भी दी राहत
हाईकोर्ट ने बायर्स के साथ ही बिल्डरों को थोड़ी सी राहत देते हुए कहा है कि वो किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में हो रही देरी पर किन्हीं जरूरी कारणों के कारण अतिरिक्त समय मांग सकते हैं। यह रेरा अथॉरिटी पर निर्भर करेगा कि वो इसके लिए समय देती है या नहीं। इसमें बिल्डर को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए तय एक साल के बाद का अतिरिक्त समय मिल सकेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था हाईकोर्ट को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सितंबर में बॉम्बे हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वो रेरा के खिलाफ बिल्डरों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अन्य अदालतों में इस कानून के खिलाफ हो सुनवाई पर रोक लगा दी थी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें