भविष्य निधि को लेकर हर नौकरीपेशा व्यक्ति काफी उत्सुक रहता है। हर महीने वेतन से कटकर भविष्य निधि में जाने वाला पैसा पहले तो खटकता है लेकिन बाद में बार-बार बैलेंस चेक करने पर वही राशि सुकून भी देती है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के खाताधारकों को कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी पेंशन स्कीम के अलावा जीवन बीमा का एक और बड़ा फायदा मिलता है और यह है सब्सक्राइबर इम्प्लाइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम।
संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में हर माह ईपीएफ की राशि कटती है और उतनी ही राशि कंपनी भी जमा करती है। मौजूदा समय में ईपीएफ में कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसद हिस्सा रकम जमा करता है और कंपनी की ओर से भी 12 फीसदी जमा की जाती है लेकिन यह दो हिस्सों में जमा होती है। कंपनी 3.67 फीसदी रकम ईपीएफ में और 8.33 फीसदी रकम ईपीएस में जमा कराती है।
लेकिन इसके अलावा भी कंपनी की ओर से कुछ योगदान दिया जाता है। ईडीएलआई स्कीम के तहत कंपनी को 0.50 फीसदी, 1.1 फीसदी ईपीएफ एडमिनिस्ट्रेटिव शुल्क और 0.01 फीसदी ईडीएलआईएस एडमिनिस्ट्रेटिव शुल्क देना पड़ता है।
इस तरह कंपनी की ओर से ईडीएलआई में जमा कराई जाने वाली 0.5 फीसदी कंट्रीब्यूशन के तहत पीपीएफ खाताधारक के नॉमिनी को छह लाख रुपये तक इंश्योरेंस कवर मिलता है। कर्मचारी भविष्य निधि में शामिल होने वाले सभी कर्मचारी ईडीएलआई 1976 के तहत कवर किए जाते हैं।
अगर ईपीएफ खाताधारक की असमय मौत हो जाती है तो उसके नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी इंश्योरेंस कवर के लिए क्लेम कर सकते हैं। क्लेम करने वाला अलग बालक या अव्यस्क है तो उसकी तरफ से उसका गार्जियन क्लेम कर सकता है। इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी को डेथ सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट और बैंक डिटेल्स देने की जरूरत होगी।
अगर पीएफ खाते का कोई नॉमिनी नहीं है तो फिर कानूनी उत्तराधिकारी इस राशि को क्लेम कर सकता है। पीएफ खाते से पैसा निकालने के लिए कंपनी के पास जमा होने वाले फॉर्म के साथ इंश्योरेंस कवर का फॉर्म भी जमा कर दें। पहले इस फॉर्म को कंपनी सत्यापित करेगी और उसके बाद कवर का पैसा मिलेगा।