ये दोनों दस्तावेज इस ऋण तथा उसके भुगतान से जुड़ी शर्तों की पुष्टि कते हैं। यदि ऋण की राशि अधिक हो, तो ये दस्तावेज जरूर तैयार करने चाहिए। ऐसे दस्तावेज कानूनी रूप से वैध हैं और विवाद की स्थिति में कोर्ट में मान्यहैं। ऋण लेते समय इस भ्रम में न रहें कि यह रिश्तेदार या दोस्त की ओर से तोहफा है, क्योंकि कर विभाग इसे अलग तरह से लेता है। इसलिए यह आपके हित में है कि आप इन सबका मतलब जानें। उदाहरण के लिए, परिवार के सदस्यों की ओर सेमिलने वाले तोहफों पर कर नहीं लगता, लेकिन यदि एक वित्त वर्ष में किसी दोस्त से (गैर रिश्तेदार या आयकर अधिनियम की 'परिवार' की परिभाषा से बाहर का कोई व्यक्ति) 50 हजार रुपये से अधिक का तोहफा कर के दायरे में आ जाता है।
कर्ज और कर
तोहफे के उलट किसी दोस्त या रिश्तेदार से मिलने वाला कर्ज (चाहे उस पर ब्याज हो या न हो) कर से मुक्त होता है। इसका मतलब है कि इस तरह आपके बैंक खाते में आने वाला धन आपकी आय में नहीं जुड़ता और उस पर कोई कर नहीं लगता। लेकिन दोस्तों या रिश्तेदारों से इस तरह की उधारी या कर्ज के साथ कुछ बंदिशें हैं। आयकर कानून के मुताबिक, पहली बंदिश तो यही है कि आप 20,000 रुपये से अधिक की राशि नकद या बेरर चेक के रूप में नहीं ले सकते। ऐसा लेन-देन अनिवार्य रूप से अकाउंट पेयी चेक या बैंक ड्राफ्ट या बैंक खाते के जरिये इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के रूप में हो।
कर्ज लेने वाले को यह पता होना चाहिए कि यदि वह मकान खरीदने के लिए दोस्तों या परिवार से कर्ज ले रहा है, तो वह ऐसे कर्ज के भुगतान के लिए कर छूट का कोई दावा नहीं कर सकता। यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि यदि कर्ज देने वाले को कर्ज की राशि ब्याज सहित वापस मिलती है, तो उसे ब्याज की राशि पर कर देना अनिवार्य है।
वित्तीय मुश्किलों से निपटने के लिए कर्ज लेने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन संजय को ध्यान रखना होगा कि इसे चुकाना भी है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह इतनी बड़ी राशि उधार में नहीं ले रहे हैं, जिसे चुकाना उनके लिए मुश्किल होगा। अच्छा होगा यदि वह सांकेतिक रूप में ही सही इस कर्ज पर कुछ ब्याज भी दें। इस ब्याज पर कर्ज देने वाले को कर न देना पड़े, इसके लिए ब्याज की राशि तोहफे के रूप में लौटा सकते हैं।