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चिंता-मनी 18: जीवन बीमा पॉलिसी सरेंडर करना सही होगा?

Mon, 31 Aug 2020 01:37 PM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
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जीवन बीमा पॉलिसी - फोटो : pixabay
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आय घटने के कारण दिल्ली के अश्विनी गर्ग जीवन बीमा की अपनी पॉलिसी सरेंडर करना चाहते हैं, पर इससे पहले यह जानना चाहते हैं कि ऐसा करना सही होगा या नहीं। एक निजी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विभाग में कार्यरत 38 साल के अश्विनी गर्ग के वेतन में 25 फीसदी की कटौती की गई है। अगर नए एकेडेमिक सेशन में छात्रों के एडमिशन में देरी हुई, तो उनके वेतन में और कटौती की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। होम लोन की ईएमआई चुकाने के अलावा उन पर दो बच्चों की स्कूल फीस का भी बोझ है। 

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यथासंभव खर्च में कटौती करने और पीएफ से पैसे निकालकर होम लोन की किस्त चुकाने के बाद वह अपनी क्रमशः सात और 13 साल पुरानी दो जीवन बीमा पॉलिसियां बंद करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि बच्चों की स्कूल फीस दे सकें। इनडॉवमेंट, यूलिप्स और बचत व निवेश आधारित दूसरी बीमा योजनाओं के पॉलिसिधारक या तो उधार ले रहे हैं या अपनी पॉलिसी सरेंडर कर रहे हैं। बीमा नियामक आईआरडीएआई ने हाल ही में यह बात साझा की है कि कोरोना के कारण आर्थिक तंगी बढ़ने से लोग किस तरह अपनी बीमा पॉलिसियां सरेंडर कर रहे हैं।

सरेंडर का मतलब क्या
इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर करने का मतलब है पूरा प्रीमियम चुकाए बगैर पॉलिसी बंद कर देना। किसी पॉलिसी का सरेंडर वैल्यू वस्तुतः इसे बंद करने वाले दिन का कैश वैल्यू होता है। यानी समय से पहले पॉलिसी बंद करने पर मिलने वाली धनराशि। समय से पहले पॉलिसी सरेंडर करने की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है, आपको मिलने वाले लाभ में भी कटौती होती है, जो अन्यथा पॉलिसी पूरे समय तक चलाने पर मिलता है। 

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पॉलिसी का सरेंडर वैल्यू अदा किए गए कुल प्रीमियम, पॉलिसी के पूरे हुए साल और बोनस के रूप में मिलने वाली राशि के आधार पर तय होता है। यूलिप्स पॉलिसी में आप प्रीमियम देना बंद कर पॉलिसी शुरू होने के पांच साल बाद सरेंडर वैल्यू हासिल कर सकते हैं। जबकि इंडॉवमेंट और मनी बैक जैसी पारंपरिक बीमा पॉलिसियों में आप तीन साल तक प्रीमियम चुकाने के बाद पॉलिसी बंद कर सकते हैं। चूंकि इनमें लॉक-इन नहीं होता, इसलिए आप कभी भी पॉलिसी बंद कर सकते हैं, लेकिन शुरुआती वर्षों में सरेंडर चार्ज बहुत अधिक होता है।
 
  10 या अधिक साल की पॉलिसियां 10 साल से कम अवधि की पॉलिसियां
गारंटीशुदा सरेंडर कम से कम तीन साल प्रीमियम चुकाने पर। कम से कम दो साल प्रीमियम चुकाने पर।
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गारंटेड सरेंडर वैल्यू का मतलब है कि आपने एक निश्चित फीसदी तक प्रीमियम अदा किया है और यह आपकी पॉलिसी के कुल प्रीमियम का 30 फीसदी है, हालांकि इसमें पहले साल अदा किए गए प्रीमियम को शामिल नहीं किया जाता। जबकि नॉन गारंटेड सरेंडर वैल्यू बहुत सारी चीजों पर निर्भर है, जैसे-सम एश्योर्ड, बोनस, पॉलिसी टर्म और अदा किए गए प्रीमियम। अमूमन नॉन सरेंडर वैल्यू सारे प्रीमियम अदा करने के बाद दिया जाता है।

कर्ज लूं या सरेंडर करूं?
सरेंडर वैल्यू वाली जीवन बीमा पॉलिसियों के एवज में भी कर्ज लिया जा सकता है। लेकिन यह कर्ज तीन से छह महीने की छोटी अवधि के लिए ही होता है। और इस पर ब्याज कंपनियों के आधार पर अलग-अलग होता है और इस पर भी निर्भर करता है कि आपके पास कौन-सी पॉलिसी है। लेकिन अभी चूंकि आर्थिक भविष्य अनिश्चित है, ऐसे में, पॉलिसी के एवज में कर्ज लेना गलत होगा। इसके बजाय पॉलिसी सरेंडर कर देना चाहिए। 

अश्विनी गर्ग को पता करना चाहिए कि उनकी दोनों पॉलिसियों का सरेंडर वैल्यू क्या है। जब पॉलिसी में वित्तीय देनदारी कम हो, तभी पॉलिसी सरेंडर करना चाहिए। अगर आपके पास दूसरी जीवन बीमा पॉलिसी नहीं है, तब आपको इसे कतई सरेंडर नहीं करना चाहिए।
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