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चिंता-मनी 3: क्या होम लोन को री-स्ट्रक्चर करना ठीक होगा?

Fri, 14 Aug 2020 04:19 PM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली
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होम लोन - फोटो : pixabay
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36 बरस के अखिलेश जौहरी गाजियाबाद में अपनी मां, पत्नी और दो बच्चों के साथ दो बेडरूम वाले एक फ्लैट में रहते हैं, जिसे उन्होंने 2013 में खरीदा था। वह 20 लाख रुपये होम लोन की किस्तें चुका रहे हैं। इसके अलावा 2018 में उन्होंने पांच लाख रुपये का जो कार लोन लिया था, उसकी किस्तें भी चुका रहे हैं। वह खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी ट्यूशन पढ़ाती हैं।

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हम जानते हैं कि ईएमआई (मासिक किस्तें) कर्जदार को कर्ज की बड़ी रकम को एक निश्चित अवधि के दौरान छोटे हिस्सों में चुकाने की सुविधा देती है। रिजर्व बैंक ने कड़े नियम बनाए हैं, जो सुनिश्चित करते हैं कि कर्जदार भुगतान करने की क्षमता से अधिक कर्जा न ले सके।

आप कितना कर्जा ले सकते हैं, वह आपकी आय पर निर्भर करता है। लेकिन आपके लिए सुझाव है कि कर्ज लेने से पहले आप यह सुनिश्चित करें कि कर्ज की किस्तें आपके घर ले जाने वाले वेतन के 40 फीसदी से अधिक न हो। अलग-अलग व्यक्तियों के लिए यह राशि अलग हो सकती है और कर्ज की अवधि भी, लेकिन इस आंकड़े को यहीं तक सीमित न रखें, तो आपको कर्ज भुगतान में मदद मिलेगी। 
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कोरोना महामारी के कारण लोगों की आय प्रभावित हुई है और भविष्य की आय को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसे देखते हुए सरकार ने कर्जदारों की मदद के लिए मोरेटोरियम यानी किस्त में छूट और लोन री-स्ट्रक्चरिंग की पेशकश की। इस बीच लॉकडाउन के चलते जौहरी की पत्नी का ट्यूशन भी बंद हो गया है।

मोरेटोरियम और री-स्ट्रक्चर-
मोरेटोरियम वह अवधि होती है, जब कर्जदार को भुगतान न करना पड़े। ध्यान रहे यह कुछ अवधि की ही छूट है, कर्ज आपको चुकाना है। लॉकडाउन के दौरान रिजर्व बैंक ने कर्जदारों को तीन से छह महीने का मोरेटोरियम उपलब्ध कराने की घोषणा की, मगर यह मुफ्त नहीं है। ईएमआई अवधि में छूट का लाभ लेने से आपके कर्ज भुगतान की किस्तें कुछ महीने के लिए बढ़ जाती हैं।

रिजर्व बैंक ने ऋणदाता यानी बैंकों से ऐसे समझदार कर्जदारों के लोग को री-स्ट्रक्चर करने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने मार्च 2020 तक अपने कर्जों की अदायगी बिना चूक और बिना विलंब के की है। इससे कर्जदारों को अपने मौजूदा लोन की ईएमआई की राशि में कमी कर दो वर्ष की अवधि तक भुगतान बढ़ाने का विकल्प मिल जाएगा।

यदि आपकी आय में कमी हुई है या भविष्य में आपको ऐसा परिदृश्य नजर आ रहा है, तो आप इसका लाभ उठा सकते हैं।

कैसे पड़ेगा प्रभाव
मोरेटोरियम यानी ईएमआई में छूट की कुल अवधि छह माह है। रिजर्व बैंक ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि कर्जदार जितनी अवधि की छूट लेता है, उसके आधार पर लोग के भुगतान की सारणी बदल जाएगी। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने यह भी स्पष्ट किया था कि मोरेटोरियम अवधि के दौरान की किस्तों का ब्याज जुड़ता रहेगा। 
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लोन री-स्ट्रक्चर करने पर आपके लोन की कुल अवधि दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। इस अवधि में कम ईएमआई देने से आपके पास खर्च करने के लिए धन बच सकेगा। यदि आप मासिक खर्च के लिए धन के संकट से जूझ रहे हैं, तो आपको यह विकल्प चुनना चाहिए। भविष्य में ऐसी और भी योजनाएं आ सकती हैं, जिस पर नजर रखें।

इन योजनाओं का 20 लाख रुपये के होम लोन पर वित्तीय प्रभाव समझने की कोशिश करते हैं। आठ फीसदी की ब्याज दर से बीस साल के लोन के लिए ईएमआई होगी 16,729 रुपये। यदि आप इसी ईएमआई के साथ तीन महीने का मोरेटोरियम लेते हैं। तो आपको दो महीने अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यदि आप अवधि को 240 महीने तक सीमित रखना चाहते हैं तो आपकी ईएमआई 337 रुपये बढ़कर 17,066 रुपये महीने हो जाएगी।

याद रखें कि उन लोगों को लोन का भुगतान अधिक करना होगा, जिन्होंने हाल ही में लोन लिया है, क्योंकि शुरुआती वर्षों में ईएमआई का बड़ा हिस्सा ब्याज पर चला जाता है।

मोरेटोरियम और री-स्ट्रक्चर के नुकसान-
  • कर्ज पर ब्याज बढ़ता रहेगा।
  • आपके कर्ज भुगतान की अवधि बढ़ जाएगी।
  • इससे कर्ज लेने की आपकी भावी रेटिंग प्रभावित होगी।
  • आवास ऋण के बदले मिलने वाली छूट पर असर पड़ सकता है।
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