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सावधान: लगातार बढ़ रहे हैं इंश्योरेंस फ्रॉड के मामले, इन बातों का रखें ध्यान, वरना होगा नुकसान

Mon, 29 Mar 2021 11:48 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लगातार बढ़ रहे हैं इंश्योरेंस फ्रॉड के मामले - फोटो : pixabay
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अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हम निवेश करते हैं और कई तरह के इंश्योरेंस प्लान लेते हैं। कोरोना काल में बीमा का महत्व और भी बढ़ा है। आजकल बाजार में कई तरह के इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध हैं, इनमें लाइफ इंश्योरेंस, ट्रैवल इंश्योरेंस, कार इंश्योरेंस, एक्सिडेंटल इंश्योरेंस, आदि शामिल हैं। किसी भी आकस्मिक आपदा से निपटने के लिए बीमा बेहद जरूरी है। बाजार में ऐसे कई सारी कंपनियां और बैंक हैं जो ग्राहकों को बीमा देती हैं। लेकिन इंश्योरेंस के नाम पर ग्राहकों को लाखों का चूना भी लगाया जा रहा है। 

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ऐसे में आपको इसे खरीदते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।  

आंख मूंदकर न मानें एजेंट की बात
आमतौर पर बीमा एजेंट ग्राहकों को पॉलिसी बेचने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं। मसलन, भारी गारंटीड रिटर्न मिलेगा, पांच साल तक ही आपको प्रीमियम जमा करना है, आगे कंपनी करेगी आदि। सबसे आम बात जो सुनने में आती है, वह यह कि रिटर्न गारंटीड है, आप फॉर्म पर साइन कर दीजिए आगे मैं सब भर लूंगा। ज्यादातर लोग इन सभी बातों पर यकीन कर पॉलिसी खरीद लेते हैं। लेकिन क्या एजेंट द्वारा कही गई सभी बातें वास्तव में सही होती हैं? तो इसका सीधा-सपाट जवाब है बिलकुल नहीं। दरअसल, बीमा एजेंट ग्राहक को वही सब बातें बताता है, जो ग्राहक को सुननी अच्छी यानी लुभावनी लगती हैं और पॉलिसी से जुड़ी तकनीकी चीजों के बारे में जानकारी मुहैया नहीं कराता है। एजेंट द्वारा इस तरह बीमा उत्पाद बेचने को ही मिस सेलिंग यानी गलत तरीके से उत्पाद बेचना कहते हैं।

बीमा कंपनी को कॉल करें
आजकल सभी बीमा कंपनियों के 24 घंटे वाले टोल फ्री नंबर उपलब्ध हैं। बीमा उत्पाद के बारे में हर तरह के स्पष्टीकरण के लिए आपको इन नंबरों पर कॉल कर सभी जरूरी जानकारियां प्राप्त कर लेनी चाहिए। यदि आपको कभी भी ऐसा लगे कि एजेंट आपको कुछ गलत तथ्य बता रहा है, तो बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर फोन पर अपने संदेह पर स्पष्टीकरण जरूर ले लें। 

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भ्रामक फोन कॉल से बचें
भ्रामक फोन कॉल के जरिए मिस सेलिंग का और भी बढ़ जाना बीमा उद्योग के लिए परेशानी व बदनामी का सबब बनता जा रहा है। इसमें कॉल करने वाले गलत जानकारी देने के साथ ही ब्याज मुक्त लोन व भारी बोनस जैसे झूठे वादे करके ग्राहकों को जाल में फंसाते हैं। कई बार तो वह मौजूदा पॉलिसी सरेंडर करके नई पॉलिसी लेने की सलाह तक देते हैं, जिससे ग्राहक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है। जांच करने पर पता चला है कि अकसर ऐसा करने वाले लोग पूर्व में कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बीमा कंपनी से जुड़े होते हैं तथा अलग होने के बाद भी खुद को कंपनी से जुड़ा बता कर इस तरह की हरकतें करते हैं। यह जानना अहम है कि आप प्रामाणिक बीमा चैनल से पॉलिसी खरीद रहे हैं या नहीं। यदि आप ऑनलाइन पॉलिसी खरीद रहे हैं, तो जांच लें कि बीमाकर्ता वेबसाइट का डोमेन वास्तविक है या नहीं।

हमेशा सुरक्षित पेमेंट विकल्प चुनें
बीमाधारकों को भुगतान के लिए हमेशा सुरक्षित पेमेंट विकल्प की चुनने चाहिए। ग्राहक चेक, डेबिट व क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन तरीकों से सीधे बीमा कंपनियों को प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। यह लेनदेन की कड़ी स्थापित करने में मदद करता है, जो नकद भुगतान में संभव नहीं है। ऐसा करने से आपके पास प्रमाण होगा कि आपने किसे पेमेंट किया है। इससे यह भी सुनिश्चित हो जाएगा कि जिस एजेंट से आपने पॉलिसी खरीदी है, वो प्रीमियम का पैसा अपनी जेब में नहीं डाल रहा है।
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