टैक्स चोरी करने वाले लोगों पर आयकर विभाग ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। करोड़ों रुपये के बकाए को वसूलने के लिए विभाग अब उस कानून का इस्तेमाल करने लगा है, जो वो भगोड़ों पर करता है। टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने के लिए विभाग ने यह प्रक्रिया अपनाई है, क्योंकि करदाताओं को नोटिस भेजने के बाद भी वो किसी भी तरह के बकाए को वापस नहीं दे रहे थे।
60 हजार करोड़ का बकाया
फिलहाल आयकर विभाग को करदाताओं से करीब 60 हजार करोड़ रुपये वसूलने हैं। वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद भी इतना संग्रह नहीं हो पाया, जिसके चलते लक्ष्य भी पूरा करने में विभाग को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बैंकों से किया संपर्क
विभाग ने अब टैक्स संग्रह बढ़ाने के लिए सीधे बैंकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग पहले केवल विलफुल डिफॉल्टर होने वाले लोगों के मामले में बैंकों से संपर्क करता था। पिछले महीने कई लोगों को विभाग ने पत्र और नोटिस भेजकर बकाया जमा करने के लिए कहा था। हालांकि ऐसा बहुत ही कम लोगों ने किया।
बैंकों ने काटना शुरू किया टैक्स
बैंकों ने आयकर विभाग के आग्रह पर ऐसे बकाएदारों के खातों से सीधा पैसा काटना शुरू कर दिया है। यह पैसा बैंक अब विभाग के खाते में जमा कराने लगे हैं। फिलहाल यह उन बकाएदारों के साथ हो रहा है, जिन्होंने बकाया राशि का 20 फीसदी भी जमा नहीं किया है।
इस राशि में किसी भी तरह का जुर्माना भी शामिल है। फिलहाल उन लोगों के बैंक खातों को भी अटैच किया जा रहा है, जिसमें पांच हजार रुपये से भी छोटी राशि शामिल है।