सरकार ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर तोहफा दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मांग को बढ़ाने की दिशा में खर्च के लिए अग्रिम में राशि दी जाएगी। उन्होंने एलटीसी कैश वाउचर योजना और स्पेशल फेस्टिवल एडवांस योजना की घोषणा की।
क्या है स्पेशल फेस्टिवल एडवांस योजना?
सरकार ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर 10,000 रुपये का ब्याज मुक्त अग्रिम देने का फैसला किया है। उपभोक्ता खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने की योजना के तहत सरकार ने यह कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को इसकी घोषणा की।
कब तक खर्च कर सकते हैं 10,000 रुपये की राशि?
10,000 रुपये का यह अग्रिम प्री-पेड रुपे कार्ड के रूप में होगा। स्पेशल फेस्टिवल एडवांस स्कीम अगले छह महीने के लिए उपलब्ध है। इसे 31 मार्च 2021 तक खर्च करना होगा।
कैसे करना होगा भुगतान?
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को इस अग्रिम का भुगतान 10 किस्तों में करना होगा। इस पर सरकार 4,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं अगर राज्य भी आएं तो 8000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उपभोक्ता मांग पैदा होगी।
क्या है LTC कैश योजना?
अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इस साल अपने कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर देने की घोषणा की है। इन वाउचर का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे गैर-खाद्य सामान खरीदने के लिए किया जा सकता है जिनपर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगता है। वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारी उन वाउचर का इस्तेमाल ऐसे उत्पाद खरीदने के लिए कर सकते हैं जिन पर जीएसटी की दर 12 फीसदी या इससे अधिक है।
कब तक खर्च कर सकते हैं राशि?
प्रत्येक चार साल में सरकार अपने कर्मचारियों को उनकी पसंद के किसी गंतव्य की यात्रा के लिए एलटीसी देती है। इसके अलावा एक एलटीसी उन्हें उनके गृह राज्य की यात्रा के लिए दिया जाता है। सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से कर्मचारियों के लिए इस साल यात्रा करना मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने उन्हें नकद वाउचर देने का फैसला किया है। इसे 31 मार्च 2021 तक खर्च करना होगा।
सरकार कितना करेगी खर्च?
एलटीसी के लिए सरकार 5,675 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों तथा बैंकों को 1,900 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से 19,000 करोड़ रुपये की मांग पैदा होगी। यदि आधे राज्यों ने इस दिशानिर्देश का पालन किया तो 9,000 करोड़ रुपये की मांग और पैदा होगी।