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ऑनलाइन खरीदारी पर नहीं मिलेगा बड़ा डिस्काउंट, नए कानून के बाद धोखाधड़ी से बच सकेंगे उपभोक्ता

Tue, 31 Jul 2018 01:42 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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केंद्र सरकार जल्द ही ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए एक नया कानून बनाने जा रही है। वर्षों से लंबित उपभोक्ता संरक्षण विधेयक में नए प्रावधानों को जोड़ा जा रहा है, जिससे कंपनियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी नकेल कसी जाएगी। इसके साथ ही बड़ा डिस्काउंट पाने की चाहत वालों को भी झटका लगेगा। 

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ऐसे लगेगा आपको झटका

अगर आप ई-कॉमर्स कंपनियों से बड़ा डिस्काउंट पाने की चाहत में सामान खरीदते हैं, तो फिर इस विधेयक के पास हो जाने के बाद ऐसा नहीं कर सकेंगी। देश भर में ई-कॉर्मस कंपनियां इसलिए ही प्रसिद्ध हुई हैं, क्योंकि इन पर एमआरपी से बेहद कम रेट पर सामान मिल जाता है।

इस वजह से लोग अब ज्यादा से ज्यादा सामान इन वेबसाइट्स से खरीदते हैं। इन कंपनियों की वजह से खुदरा दुकानदारी पर भी काफी असर पड़ा है, क्योंकि दुकानों पर बिक्री काफी कम हो गई है। 
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इन कंपनियों पर भी लगेगी लगाम

ड्राफ्ट पॉलिसी के अनुसार अब रेस्टोरेंट से खाना डिलीवर करने वाली वेबसाइट्स स्वीगी और जोमाटो, सर्विस प्रोवाइडर अर्बन क्लैप व पेटीएम और पॉलिसी बाजार को भी इस कानून के तहत लाया जाएगा, जिससे इन पर भी लगाम लगेगी।

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गलत डिलीवरी पर रोक

डिलीवरी में देरी, गलत माल भेजना, वापसी में होने वाली दिक्कत और उत्पाद बदलने में आनाकानी जैसे पहलुओं को अब शामिल किया जाएगा और ई-कॉमर्स कंपनियों को उत्पाद के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा।

फर्जी रेटिंग पर भी लगेगी रोक

इसके अलावा अब इन कंपनियों की वेबसाइट पर उत्पाद की फर्जी रेटिंग दी जाती है, जिससे लोग इस पर विश्वास करके सामान खरीद लेते हैं। लेकिन जब उत्पाद घर पर आता है, तो उसकी वो गुणवत्ता नहीं होती है, जो की वेबसाइट पर दर्शायी गई होती है। इस तरह की रेटिंग पर भी रोक लगेगी, जिससे उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। वहीं कंपनियों के साथ ही विक्रेता को जुर्माना भी देना पड़ेगा। 

मेक इन इंडिया पर जोर

ड्राफ्ट पॉलिसी में पूरी तरह से मेक इन इंडिया पर जोर है। इससे कंपनियां विदेशी सामान नहीं बेच सकेंगी। इनको पूरी तरह से भारत में बने उत्पादों को बेचना होगा। इससे देश में कार्यरत ई-कॉमर्स कंपनियों पर विदेशी सामान मिलना मुश्किल हो जाएगा।  
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