इस्तेमाल किये हुए (सेकेंड हैंड) सामान ऑनलाइन बेचने की सुविधा प्रदान करने वाली कंपनी ओएलएक्स का कहना है कि भारतीयों के घरों में 46,200 करोड़ रुपये की वस्तुएं यूं ही पड़ी हैं और धूल खा रही हैं। यह भी आंकड़ा सिर्फ शहरी इलाके का है। कंपनी ने इस तरह के सामान को ब्राउन मनी नाम दिया है।
ओएलएक्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमरजीत बत्रा ने ओएलएक्स क्रस्ट सर्वेक्षण को यहां बुधवार को जारी करते हुए बताया कि शहरी भारत में पुरानी या इस्तेमाल की हुई वस्तुओं के बाजार का आकार करीब 46,200 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है।
पिछले साल था 22 हजार करोड़ रुपए का अनुमान
क्रस्ट भारत का पहला समग्र अनुसंधान है, जो भारत में पुरानी वस्तुओं के बाजार के आकार का अनुमान लगाता है और पुरानी वस्तुओं को लेकर लोगों के नजरिए का भी आकलन करता है। पिछले साल क्रस्ट ने अनुमान लगाया था कि पुरानी वस्तुओं के बाजार का आकार करीब 22,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।
बत्रा का कहना है कि घरों में बेकार पड़ी वस्तुएं ब्राउन मनी है जो कि यूं ही धूल खा रही हैं। इसे यदि बेच दिया जाए तो जहां पुराने मालिक को कुछ पैसे मिलते हैं, वहीं उस बेकार वस्तु का उपयोग होता है। इससे अर्थव्यवस्था को भी मदद मिलती है।
उनके मुताबिक 46,200 करोड़ रुपये की रकम कोई छोटी रकम नहीं है।
125 बार भेजा जा सकता है मंगलयान
इस रकम से से मंगल अभियान पर मंगलयान को 125 से भी ज्यादा बाद भेजा जा सकता है, भारतीय खाद्य निगम के पूरे बकाये को चुकाया जा सकता है। यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए आवंटित रकम से भी डेढ़ गुना है।
बत्रा के मुताबिक एक ब्रांड के तौर पर ओएलएक्स राष्ट्रीय, पर्यावरण और लोगों को जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने को इच्छुक है। ओएलएक्स लोगों को एक ऐसा प्लेटफार्म मुहैया कराते हैं, जहां वे पुराने सामान को बेच और खरीद सकें। कंपनी उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद कर उनके जीवन को छूते हैं।