सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक को 2.83 लाख करोड़ रुपये (4 करोड़ डॉलर) का जुर्माना देना होगा। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे वीडियो विज्ञापनों के समय की गणना करने में गलती की थी। अमेरिका की फेडरल ट्रेड कमीशन ने कंपनी को विज्ञापनदाताओं की याचिका पर यह फैसला दिया है।
2015 से लेकर के 2016 के बीच 18 महीने के दौरान कंपनी के विज्ञापनदाताओं को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ा। इस बारे में कुछ विज्ञापनदाताओं ने 2016 में कंपनी के खिलाफ सैनफ्रांसिस्को की अदालत में मुकदमा दर्ज कर दिया। विज्ञापनदाताओं का आरोप था कि कंपनी ने केवल तीन सेकंड से ज्यादा समय वाले वीडियो की गणना की और इससे कम समय वाले विज्ञापनों को सूची से निकाल दिया। इसके अलावा आर्टिफिशियल तरीकों का इस्तेमाल करके औसत समय को भी बढ़ा दिया।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक की प्रमुख प्रतिद्वंदी कंपनी स्नेपचैट एफटीसी की इस मामले में मदद कर रही है। उसने प्रोजेक्ट वोल्डेमोर्ट के तहत एक डोजियर तैयार किया है, जिसमे फेसबुक के सभी राज मौजूद हैं। स्नेप और फेसबुक में काफी समय से लड़ाई जारी है। फेसबुक ने अपने इंस्टाग्राम पर स्नेपचैट के कई सारे फीचर्स कॉपी करके लगा रखा है। इससे पहले भी कंपनी पर 34 हजार करोड़ का जुर्माना लगा था।
फेसबुक के सीईओ एवं संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को समझौते के क्रियान्वयन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। फेसबुक के पास 2.7 अरब से अधिक ग्राहकों का डाटा है। युवा अरबपति को तीन-तीन महीने के अंतराल पर यह प्रमाणित करने के लिए एफटीसी के पास जाना होगा कि उनकी कंपनी समझौते का पालन कर रही है।