दूरसंचार नियामक भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) उपभोक्ता हितों को कायम रखने, दूरसंचार उद्योग को बढ़ावा देने और दुनियाभर में इस क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को देश में लाने की दिशा में काम कर रहा है। अवांछित कॉल, नंबर पोर्टेबिलिटी या फिर सेटटॉप बॉक्स की इंट्रापोर्टेबिलिटी जैसी तमाम सेवाओं और सुविधाओं के लिए इसने दूरसंचार क्षेत्र में अहम कार्य किया है। दूरसंचार क्षेत्र में ग्राहक सेवा सुधारने, डाटा सुरक्षा और कंपनियों के हालात पर ट्राई की भूमिका और उठाए जाने वाले कदमों समेत अन्य मुद्दों पर
पीयूष पांडेय ने नियामक के
चेयरमैन आरएस शर्मा से विस्तृत बातचीत की। पेश है उसके मुख्य अंश :
प्रश्न - दूरसंचार क्षेत्र में कंपनियों का विलय हो रहा है। ऐसे में देश में इस क्षेत्र के भविष्य के बारे में आपका क्या कहना है।
उत्तर - देखिए! ऐसा प्रतिस्पर्धा के चलते हो रहा है। कई बार दूरसंचार कंपनियां अपने फायदे के लिए विलय करती हैं, जबकि कई बार मजबूरी में भी ऐसा किया जाता है। यह मूलत: व्यवसाय से जुड़ा निर्णय है। नियामक का इससे कोई लेना-देना नहीं। यह कुछ समय के लिए यह प्रतिस्पर्धा का प्रभाव है। हालांकि मेरा मानना है कि दूरसंचार क्षेत्र का भविष्य इस देश में बहुत उज्ज्वल है। रही बात टैरिफ की तो हमने साल 2004 में ही इसका नियमन नहीं करने का निर्णय लिया था। ऐसे में अगर कोई कहता है कि हमारे टैरिफ कम कर देने से दूरसंचार क्षेत्र नुकसान में है, तो यह बिल्कुल गलत है। क्योंकि यह क्षेत्र खुद ही टैरिफ का नियमन करता है।
प्रश्न - दुनियाभर में डाटा सुरक्षा पर कदम उठाए जा रहे हैं, इस दिशा में ट्राई क्या कर रहा है?
उत्तर - डाटा संरक्षण, डाटा निजता और सुरक्षा, तीनों अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर कानून बनाने के लिए सरकार ने जस्टिस श्रीकृष्णा के नेतृत्व में एक समिति बनाई है। मेरा मानना है कि समिति की सिफारिशें आते ही सरकार डाटा सुरक्षा को लेकर मजबूत कानून बनाएगी। जब तक यह कानून नहीं बनता, तब तक इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी कानून है। उसमें डाटा संरक्षण और सुरक्षा के प्रावधान हैं। ट्राई ने जस्टिस श्रीकृष्णा समिति के गठन से पहले इस पर एक परामर्श पत्र जारी किया था, जिसका मूल विषय दूरसंचार में डाटा पर मालिकाना हक, सुरक्षा और निजता है। इसमें सेवा प्रदाता के नियंत्रण के स्तर पर डाटा की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए, उस पर हमने लंबी चर्चा की और इस संबंध में सिफारिशें जारी करने को लेकर अंतिम चरण में हैं। उम्मीद है कि जल्द इस पर अनुशंसा जारी की जाएगी।
प्रश्न - ट्राई अनचाहे कॉल और एसएमएस रोकने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का प्रयोग करेगा, क्या इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है?
उत्तर - अनचाहे कॉल और एसएमएस को रोकने के लिए ट्राई द्वारा जारी किए गए मसौदे की संरचना बहुत मजबूत है। अभी तक हम केवल दूरसंचार सेवा प्रदाता और पंजीकृत टेली मार्केटियर को ही इसके नियमन के लिए जिम्मेदार मान रहे थे। लेकिन उनकी आड़ में जो अनचाहे कॉल आते हैं, वे भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। मान लें कोई बैंक, बीमा या क्रेडिट कार्ड कंपनी है। वह अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए संदेश भेज रही है, तो वह भी इसमें हिस्सेदार हो गई। नई संरचना में हमने सारे हिस्सेदारों को शामिल किया है और जो मूल है वह यही कि सारी गतिविधियों को ब्लॉकचेन में रखा जाए। इसके जरिये शिकायत मिलने पर तत्काल उस हिस्सेदार को आसानी से खोज लिया जाएगा। एक बात स्पष्ट कर दूं कि भारत पहला देश है, जहां इसके लिए ऐसी व्यवस्था हो रही है।
प्रश्न - नंबर पोर्टेबिलिटी को सरल बनाने को लेकर ट्राई क्या कदम उठा रहा है।
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उत्तर - मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सुविधा को सरल करने के लिए हमने परामर्श पत्र जारी किया था। हमारा मानना है कि नंबर पोर्टेबिलिटी उपभोक्ता का बड़ा अधिकार है और उस अधिकार को मुहैया कराने के लिए प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है, ताकि कोई भी आसानी से उस प्रक्रिया को निभा सके और सेवा प्रदाता की दया दृष्टि पर नहीं रहना पड़े।
प्रश्न - 4जी में गुणवत्ता सेवाएं मुहैया कराने के लिए नियामक ने क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर - पिछले साल अगस्त में हमने नए मानदंड बनाए थे, जो 1 अक्तूबर, 2017 को लागू किए गए। हमने पिछली तिमाही उसका पहली बार आकलन किया। हमें खुशी है कि अब जो व्यवस्था है, उसमें टावर के अनुरूप यह पता चल रहा है कि कौन सा काम कर रहा है या नहीं, जबकि औसत आकलन में यह स्पष्टीकरण छिप जाता है। इसमें खराब क्षेत्र, टावर या अन्य व्यवस्था नजर में आने लगी है और उसमें तेजी से सुधार हो रहा है।
प्रश्न - कॉलड्रॉप के बारे में ट्राई का क्या कहना है। यह कितना हकीकत है और कितना फसाना है?
उत्तर - नए पैरामीटर के साथ सुधार आ रहा है। यह बात भी सच है कि हमारे देश में मौजूदा समय 2जी, 3जी, 4जी और वोल्टी सारी सेवाएं एक साथ चल रही हैं। इसमें कई बार क्या हो रहा है कि कॉल सेटअप टाइम तब बढ़ जाता है, जब 2जी उपभोक्ता 4जी उपभोक्ता को कॉल करता है। ऐसी कई सारी तकनीकी परेशानियां भी हैं, जो आने वाले वक्त में पूरी तरह से ठीक होंगी।
प्रश्न - डाटा स्पीड पर सभी कंपनियों के अलग-अलग दावे हैं। इस बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर - डाटा स्पीड को लेकर ट्राई ने एक माईस्पीड एप बनाया है, जिसमें सेवा प्रदाता द्वारा मुहैया कराई जा रही स्पीड को लोगों द्वारा माप कर सार्वजनिक किया जाता है। कंपनियां दावे कर रही हैं, यह एक अलग बात है। कोई भी अपने उत्पाद को बेहतर बताता है। हालांकि इसके लिए भी ट्राई ने परामर्श पत्र जारी किया है।
प्रश्न था- सेटटॉप बॉक्स में ग्राहकों को पोर्टेबिलिटी की सुविधा कब तक मिलेगी?
उत्तर - सेटटॉप बॉक्स पोर्टेबिलिटी उसी तर्ज पर है, जैसे मोबाइल सिम में सेवा प्रदाता को पोर्ट करने की व्यवस्था है। ट्राई इस नतीजे पर पहुंचा कि जिस प्रकार से मोबाइल सेट खरीदते हैं और उसमें किसी भी कंपनी का सिमकार्ड चलता है, उसी तरह सेटटॉप बॉक्स में किया जाए। ताकि उपभोक्ता को बार-बार बेवजह सेवा प्रदाता को बदलने में खर्च नहीं उठाना पड़े। बहुत हद तक हम उसमें आगे बढ़ चुके हैं। इस पर सी डॉट समेत अन्य के साथ काम कर अब हम प्रोटो-टाइप बनाने की स्थिति में आ गए हैं। इसी महीने बंगलूरू में इसका परीक्षण होगा और सफलता मिलने पर व्यवस्था को लागू किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले माह तक लोगों को सेटटॉप बॉक्स सेवा प्रदाता बदलने की सुविधा मिलेगी।