डाटा सुरक्षा और नई तकनीक की चुनौतियों के बीच नए साल में भारतीय आईटी उद्योग को ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) में निवेश से उछाल मिल सकती है। आईटी उद्योग के व्यापार संगठन नासकॉम ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह संभावना जताई है।
नासकॉम के अध्यक्ष देबजानी घोष के अनुसार, नया साल आईटी उद्योग के लिए कई तरह से परिवर्तनकारी होगा। विभिन्न स्टार्टअप के आने से नवोन्मेष, नीतियों और भागीदारी में व्यापक स्तर पर परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि चालू वित्त वर्ष 2018-19 में निर्यात में 7 से 9 फीसदी की तेजी रहेगी, जो पिछले साल के बराबर है। हालांकि इस दौरान घरेलू राजस्व में 10 से 12 फीसदी का उछाल आ सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते संरक्षणवाद के कारण भारतीय आईटी पेशेवरों की मांग घट रही है। इसका असर आईटी उद्योग पर भी दिखेगा।
नए कानून से आईटी उद्योग को सहारा
सायंट के कार्यकारी अध्यक्ष बीवीआर मोहन रेड्डी का कहना है कि संरक्षणवाद के चलते भारतीय आईटी पेशेवरों को बाहरी देशों से वीजा नहीं मिलने का असर इस उद्योग पर नहीं पड़ेगा। कंपनियों की निगाह ऐसे वैश्विक मुद्दों पर है और इससे निपटने के लिए स्थानीय पेशेवरों की भर्तियां की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि इस साल मई में यूरोपीय संघ ने जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेग्युलेशन (जीडीपीआर) को मंजूरी दे दी। इसके बाद कंपनियां ग्राहकों के निजी डाटा का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। ऐसा करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इस नए कानून से आईटी उद्योग को भी सहारा मिलेगा।
भारत के लिए अवसर
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के अध्यक्ष अनंत महेश्वरी का कहना है कि यह भारत के लिए बेहतरीन अवसर है। उसे विशेषज्ञता और क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान देने के साथ कंसल्टिंग बिजनेस और सलाह की नई पंक्ति तैयार करनी चाहिए। भारत अपना डाटा सेंटर अलग से स्थापित कर रहा है और इसके लिए नई डाटा पॉलिसी भी बनाई जा रही है। सरकार के इन कदमों से आईटी उद्योग ज्यादा सुरक्षित महसूस करेगा और उसे आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।