सीतारमण ने रियाद सम्मेलन के दूसरे दिन कॉरपोरेट बांड बाजार को व्यापक बनाने के लिये भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके लिये भारत सरकार ने कॉरपोरेट बांड बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश की सीमा बढ़ायी है तथा सरकारी प्रतिभूतियों की कई घोषित श्रेणियों के लिये पूंजी नियंत्रण को समाप्त किया है।
उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर जी20 के साथ संवाद जारी रखना चाहती हैं।मंत्रालय के ट्वीट के अनुसार, सीतारमण ने जी20 के सदस्यों को बांड में चूक के जोखिम- प्रीमियम (क्रेडिट डिफाल्ट स्वैप) बाजार में सुधार के लिये उठाये गये कदमों की जानकारी दी।
इसके साथ ही उन्होंने एक्सचेंजों के जरिये इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बांड की खरीद-बिक्री के बदलते तरीके, सभी के लिये कभी भी आवेदन करने की सुविधा समेत अन्य उन कदमों की भी जानकारी दी, जो भारतीय बांड बाजार में निवेश बढ़ाने के लिये उठाये गये हैं।
उन्होंने बुनियादी संरचना में निवेश से संबंधित सत्र को संबोधित करते हुए जी20 के इंफ्राटेक प्रौद्योगिकी एजेंडा (बुनियादी संरचना प्रौद्योगिकी) को लेकर किये जा रहे प्रयासों का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने जी20 के सदस्य देशों को इस प्रकार की प्रौद्योगिकी के मामले में सबके लिए एक जैसे नुस्खे सुझाने से बचने की सलाह दी। इसके पीछे उनका तर्क है कि अलग-अलग देश बुनियादी संरचना में प्रौद्योगिकी अपनाने के विभिन्न चरणों में हैं।
उन्होंने बुनियादी संरचना में प्रौद्योगिकी अपनाने में फास्टैग तथा बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के भारत के सफल प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर से राजस्व की चोरी रोकने में मदद मिलेगी, जबकि फास्टैग से टोल शुल्क का इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संकलन संभव हुआ है।